हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल। (फाइल फोटो)
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हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सोनीपत जिले में नेशनल हाईवे 44 पर हरियाणा रोडवेज के चालक जगबीर की हत्या और उनके बेटे संदीप द्वारा आत्महत्या करने पर दुख जताया। मुख्यमंत्री ने कहा यह काफी दुखद घटना है। हरियाणा पुलिस मामले की तफ्तीश में लगी है और जल्द ही चालक की हत्या के आरोपी काबू किए जाएंगे। इसके अलावा, पीड़ित परिवार के एक सदस्य को नीति के तहत सरकारी नौकरी दी जाएगी। इस दुख की घड़ी में हरियाणा सरकार पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है।
प्रदेश में नशा मुक्ति केंद्र खोलने के लिए होगा सर्वे: मनोहर लाल
लोगों की नशे की लत छुड़वाने के लिए प्रदेश में नशा मुक्ति केंद्र खोलने के लिए एक सर्व कराया जाएगा। इससे यह पता लगेगा कि आज के समय में किस जिले में कितने नशा मुक्ति केंद्र खोलने की जरूरत है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग रेडक्रास सोसाइटी या अन्य संस्थाओं द्वारा चलाए जा रहे नशा मुक्ति केंद्रों की भी जानकारी एक प्लेटफार्म पर एकत्रित की जाएगी। इसके अलावा, प्रदेश के जिला अस्पतालों में फर्स्ट एड विंग खोली जाएंगी, ताकि रेडक्रॉस द्वारा दी जाने वाली फर्स्ट-एड की ट्रेनिंग इन विंग के माध्यम से प्रदान की जाए।
यह जानकारी मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने दी। वह गुरुवार को हरियाणा राजभवन में आयोजित राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय की अध्यक्षता में भारतीय रेडक्रॉस सोसाइटी की हरियाणा राज्य शाखा की प्रबंध समिति की बैठक में बोल रहे थे। बैठक में निर्णय लिया गया कि सेंट जॉन एंबुलेंस द्वारा संचालित एंबुलेंस और ड्राइवर को स्वास्थ्य विभाग को स्थानांतरित किया जाएगा और अब इनका संचालन स्वास्थ्य विभाग करेगा।
सीएम ने कहा कि जिलों में बने नशा मुक्ति केंद्रों की कार्यप्रणाली की निगरानी के एसडीएम को निर्देश दिए गए हैं कि वे महीने में एक बार अपने-अपने जिलों में बने नशा मुक्ति केंद्रों का दौरा कर वहां दी जा रही सुविधाओं और कार्यप्रणाली का जायजा लेंगे। मनोहर लाल ने यह भी निर्देश दिए कि एक पोर्टल विकसित किया जाए, जिस पर जिले के सरकारी अस्पतालों, निजी अस्पतालों और रेडक्रॉस या विभिन्न संस्थाओं द्वारा संचालित एंबुलेंस की जानकारी दर्ज की जाए, जिससे लोगों को अलग-अलग माध्यमों के बजाय सिंगल प्लेटफॉर्म पर संपर्क करने की सुविधा मिलेगी।
18 वर्ष से अधिक आयु वाले मानसिक रूप से कमजोर व्यक्तियों के लिए नई योजना
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में, 18 वर्ष आयु तक के मानसिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए देखभाल करने की व्यवस्था है, परंतु 18 वर्ष से ऊपर आयु के व्यक्तियों के लिए इस प्रकार की कोई संस्थागत व्यवस्था नहीं है। उनकी देखभाल के लिए भी एक योजना बनाने की संभावना तलाशी जाएं।