सीएम भगवंत मान ने परिवार को सौंपा चेक।
- फोटो : पंजाब सीएम
ड्यूटी के दौरान बलिदान देने वाले अग्निवीर अजय सिंह के परिवार को पंजाब के सीएम भगवंत मान ने गुरुवार को एक करोड़ रुपये का चेक सौंपा। अग्निवीर अजय सिंह ने 23 साल की उम्र में बलिदान दिया था। वह खन्ना के गांव रामगढ़ सरदार के रहने वाले थे। जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले के नौशेरा सेक्टर में बारूदी सुरंग में विस्फोट की चपेट में आने की वजह से उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ी थी।
शहीद के परिवार से दुख साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बहादुर जवान ने ड्यूटी निभाते हुए अपनी जान न्योछावर कर दी, जो देश के लिए खासकर मां-बाप के लिए अपूरणीय क्षति है। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के लिए शहीद जवान के बलिदान का सत्कार करते हुए परिवार को वित्तीय सहायता दी जा रही है। पूरा मुल्क शहीदों का ऋणी है, जिन्होंने देशवासियों की रक्षा करते हुए जान कुर्बान कर दी। मुख्यमंत्री ने ईश्वर के समक्ष दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीद का महान बलिदान उनके साथी सैनिकों और नौजवानों को अपनी ड्यूटी के प्रति निष्ठा और समर्पित भावना से निभाने के लिए प्रेरित करेगी। उन्होंने यह भी एलान किया कि गांव के सरकारी स्कूल का नाम शहीद के नाम पर रखने का नोटिफिकेशन पहले ही जारी किया जा चुका है और राज्य सरकार द्वारा शहीद के नाम पर खेल मैदान/स्टेडियम भी बनाया जाएगा। इसके साथ ही गांव में आम आदमी क्लीनिक भी बनाया जाएगा। जिसका नाम शहीद के नाम पर रखा जाएगा। शहीद के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी दी जाएगी।
अग्निवीर नौजवानों के शोषण की योजनाः मान
अग्निवीर योजना का विरोध करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बहादुर सैनिकों के योगदान का निरादर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना देश के नौजवानों का शोषण है क्योंकि उन्हें छोटी उम्र में थोड़े समय की नौकरी करने के बाद बिना किसी वित्तीय सुरक्षा के वापस घर भेज दिया जाता है। मान ने कहा कि इस योजना को देश के हित में तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र की सत्ता पर काबिज लोगों को इन शहीदों के परिवारों के साथ कोई हमदर्दी नहीं है, जिस कारण वह इन शहीदों के परिवारों की भलाई की कभी चिंता नहीं करते।
छह बेटियों के बाद पैदा हुआ था बेटा
शहीद अजय सिंह के पिता चरणजीत सिंह ने बताया कि छह बेटियों के बाद उनके घर बेटा हुआ था। वे खुद मजदूरी करते थे। कड़ी मेहनत करके बेटे का पालन पोषण किया। पत्नी भी काम करती थी। बेटियां भी प्राइवेट नौकरी करती थीं। बेटा खुद कभी पेंट करने जाता था तो कभी राजमिस्त्री के साथ दिहाड़ी पर जाता था। 12वीं पास करने के बाद फरवरी 2022 में बेटा भर्ती हुआ। अब आस थी कि बेटा परिवार का सहारा बनेगा लेकिन उन्हें नहीं पता था कि ऐसे बेटा शहीद हो जाएगा। अजय सिंह को फरवरी महीने में छुट्टी पर घर आना था।