बेअदबी के मामले और बहिबल कलां व कोटकपुरा में धरना दे रहे सिख श्रद्धालुओं पर पुलिस फायरिंग की घटनाओं की जांच कर रही एसआईटी अपने भीतरी विवाद में घिरती नजर आ रही है। चुनाव आचार संहिता की अवधि समाप्त होने के बाद ड्यूटी पर लौटे एसआईटी के प्रमुख सदस्य आईजी कुंवर विजय प्रताप की वापसी अब एसआईटी के मुखिया और अन्य सदस्यों को अखर गई है।
सूत्रों के अनुसार, एसआईटी के मुखिया और अन्य सदस्यों ने राज्य के डीजीपी को जानकारी दी है कि आईजी कुंवर विजय प्रताप सिंह द्वारा बरगाड़ी और बहिबल कलां मामले में जो चालान अदालत में पेश किया गया है, उसे लेकर आईजी ने न तो एसआईटी के मुखिया से और न ही अन्य सदस्यों से कोई राय मश्विरा किया है। एसआईटी की ओर से डीजीपी को यहां तक कह दिया गया है कि अदालत में पेश किए गए चालान के बारे में उन्हें कुछ भी पता नहीं है। वैसे डीजीपी को यह भी बताया गया है कि चालान में काफी गड़बड़ियां हैं।
ऐसे में अगर अदालत द्वारा चालान पर एसआईटी से कोई जवाब तलबी की गई तो अफसरों के पास कोई जवाब नहीं है। उल्लेखनीय है कि तीन दिन पहले ही कुंवर विजय प्रताप सिंह की ओर से बेअदबी, बहिबल कलां फायरिंग मामलों को लेकर अदालत में चालान पेश किया गया है, जिसमें अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल, जो पिछली सरकार में उप मुख्यमंत्री व गृह मंत्री थे, के अलावा तत्कालीन डीजीपी सुमेध सैनी और डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह के नाम शामिल हैं।