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Chandigarh: चंडीगढ़ की हवा हुई जहरीली, शाम को ‘बहुत खराब’ से ‘गंभीर’ की श्रेणी में पीएम 2.5

Wed, 09 Nov 2022 02:03 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

विशेषज्ञों के अनुसार पराली का सीजन जब तक रहेगा, तब तक हवा पर ऐसा ही असर रहेगा। पराली से हजारों टन जहरीली गैस निकलती हैं, जो हवा के रुख से चंडीगढ़ पर असर डालती हैं। इसके अलावा मौसम का असर भी है क्योंकि ठंड में सभी धूल कण नहीं उड़ पाते हैं और हवा में जम जाते हैं, इससे प्रदूषण का स्तर बढ़ता है।
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चंडीगढ़ में छाई धुंध। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चंडीगढ़ की आबोहवा जहरीली होती जा रही है। रोजाना शाम के समय शहर की हवा में प्रदूषण का स्तर काफी ज्यादा बढ़ जा रहा है। एक्यूआई भी खराब की श्रेणी में बना हुआ है, जबकि हवा में पीएम 2.5 की मात्रा बहुत खराब से गंभीर की श्रेणी में भी पहुंच जा रही है। ये बहुत चिंता की बात है।

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मंगलवार रात नौ बजे सेक्टर-53 का एक्यूआई 301, सेक्टर-22 का 250 और सेक्टर-25 का 180 दर्ज किया गया। बढ़ा एक्यूआई उन लोगों की परेशानी बढ़ा सकता है, जिन्हें सांस संबंधी कोई बीमारी है। पर्यावरण विभाग के अधिकारियों के अनुसार पड़ोसी राज्यों में जल पराली प्रदूषण बढ़ने का सबसे बड़ा कारण है।

मंगलवार को सेक्टर-53 और 22 में पीएम 2.5 की मात्रा 300 पार यानी ‘बहुत खराब’ की श्रेणी में रहा, जबकि सोमवार शाम को सेक्टर-53 में पीएम 2.5 ‘बहुत खराब’ से 400 पार यानी ‘गंभीर’ की श्रेणी में पहुंच गया। शहर की हवा में पीएम 2.5 का इस कदर बढ़ जाना बड़ी चिंता की बात है, क्योंकि सबसे ज्यादा यही लोगों को नुकसान पहुंचाते हैं।
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अमेरिका के शोध संगठन हेल्थ इफेक्ट्स इंस्टीट्यूट (एचईआई) की ओर से पेश ताजी रिपोर्ट के मुताबिक 2019 में दुनिया भर के 7,239 शहरों में पीएम 2.5 प्रदूषण के कारण 1.7 मिलियन मौतें हुईं। प्रति एक लाख आबादी पर दिल्ली में 106 और कोलकाता में 99 लोगों की मौत हुई थी। रिपोर्ट कहती है कि भारत और इंडोनेशिया में पीएम 2.5 प्रदूषण में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई है।

जब तक पराली जलेगी, खराब रहेगी आबोहवा
विशेषज्ञों के अनुसार पराली का सीजन जब तक रहेगा, तब तक हवा पर ऐसा ही असर रहेगा। पराली से हजारों टन जहरीली गैस निकलती हैं, जो हवा के रुख से चंडीगढ़ पर असर डालती हैं। इसके अलावा मौसम का असर भी है क्योंकि ठंड में सभी धूल कण नहीं उड़ पाते हैं और हवा में जम जाते हैं, इससे प्रदूषण का स्तर बढ़ता है। शहर में पेड़ों की संख्या और हरियाली अधिक होने से प्रदूषण कुछ नियंत्रण में है।

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सात दशक में शहर का औसत न्यूनतम तापमान 1.78 डिग्री बढ़ा
प्रशासन की एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले सात दशक में शहर का औसत न्यूनतम तापमान 1.78 डिग्री, जबकि अधिकतम तापमान 0.63 डिग्री सेल्सियस बढ़ गया है। मानसून का पैटर्न बदल गया है। अत्यधिक सर्दियों का मौसम नवंबर और दिसंबर से जनवरी में स्थानांतरित हो गई है। इसके पीछे कई कारण है लेकिन एक अहम कारण शहर में गाड़ियों की बढ़ती संख्या है।

शहर में रोजाना लगभग 200 वाहनों का पंजीकरण हो रहा है। केंद्र सरकार की वाहन सेवा पोर्टल के अनुसार ही शहर में आठ लाख से ज्यादा वाहन पंजीकृत हैं। इसके अलावा कई पुराने वाहन हैं, जो डिजिटलाइजेशन की प्रक्रिया से पहले के पंजीकृत हैं। दूसरा कारण जनसंख्या है, जो वर्ष 1951 में सिर्फ 24261 थी। पिछले छह दशकों (1951 से 2011) में 44 गुना बढ़ कर 10 लाख से ज्यादा हो चुकी है।

क्या होता है पीएम 2.5?
पीएम 2.5 प्रदूषक कणों की उस श्रेणी को संदर्भित करता है, जिसका आकार 2.5 माइक्रोन के करीब का होता है। ये बहुत छोटे कण होते हैं, जो सांस लेने के दौरान शरीर में प्रवेश कर गले में खराश, जलन और फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। मुख्य रूप से आग, बिजली संयंत्रों और औद्योगिक प्रक्रियाओं के कारण इसका स्तर बढ़ता है। पीएम 2.5 के बढ़ने के कारण धुंध छाने और साफ न दिखाई देने के साथ कई गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।

एक्यूआई स्तर
  • शून्य से 50: अच्छा
  • 51-100: संतोषजनक
  • 101-200: मध्यम
  • 201-300: खराब
  • 301-400: बहुत खराब
  • 401-500: गंभीर
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