सुखना लेक पर वन्य जीवन सप्ताह के तहत स्कूली बच्चे विभिन्न वन्यजीवों की ड्रेस पहन कर सुखना वाक करत
चंडीगढ़। ‘वन्यजीव सप्ताह’ के तहत चेहरे पर बच्चों ने पेंटिंग बनाकर और वन्य जीवों की तस्वीरों को साथ लेकर दोस्ती, प्यार और शांति का संदेश दिया। यह कार्यक्रम शनिवार को सुखना लेकर पर मनाया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन यूटी प्रशासन के वन और वन्यजीव विभाग के मुख्य वन संरक्षक देबेंद्र दलाई ने किया। उन्होंने सुखना लेक पर पक्षियों और जानवरों के रूप में सजे 100 स्कूली बच्चों के एक समूह को हरी झंडी दिखाई। इसके बाद जानवरों के अधिकारों और प्रकृति के साथ सद्भाव में रहने का संदेश देते हुए प्लेकार्ड लेकर इन बच्चों ने लेक के किनारे वॉक किया। इस अवसर पर चंडीगढ़ के उप वन निरीक्षण डॉ. अब्दुल कयूम और युवसत्ता के संयोजक प्रमोद शर्मा भी मौजूद थे।
महात्मा गांधी के ‘बी द चेंज’ के संदेश का उल्लेख करते हुए देबेंद्र दलाई ने कहा कि हम बढ़ते हुए हैबीटेट टॉस, वनों की कटाई और अत्यधिक शोषण वाली दुनिया में आगे बढ़ रहे हैं जो कि धरती माता की समृद्ध बायोडायवर्सिटी के लिए खतरा है। उन्होंने कहा कि वन्यजीव सप्ताह में युवाओं के लिए यही संदेश है कि वे पशु अधिकारों के पैरोकार बनें। जानवरों को भी दुर्व्यवहार, शोषण या विनाश के डर के बिना अस्तित्व का अधिकार है। साथ ही मौजूदा फ्लोरा और फौना की बायोडायवर्सिटी का भी संरक्षण किया जाता है। उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण हमारे स्वभाव में निहित है और हमेशा हमारी परंपरा और संस्कृति का एक अभिन्न अंग रहा है।
यह कार्यक्रम यूटी प्रशासन के वन और वन्यजीव विभाग और शहर की स्वयंसेवी संस्था युवसत्ता, गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल धनास, गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल-18सी और सेंट जोसफ सीनियर सेकेंडरी स्कूल के ईको क्लब्स की ओर से आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत धनास के गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल के स्टूडेंट्स की ओर से पेश किए गए ‘जंगल डांस’ से हुई। उन्होंने चेहरे पर पेंटिंग बनाई हुई थी और वन्यजीवों की तस्वीरों को साथ लेकर दोस्ती, प्यार और शांति का संदेश देते हुए शब्द लिखे थे। बताया गया कि इस तरह के कार्यक्रम आगे भी होंगे।