श्री गुरु तेग बहादुर के 400वें प्रकाश पर्व के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बुधवार को सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के बनाए भक्ति गीत को लांच किया। उन्होंने हिंदी और पंजाबी भाषा में बनाए पोस्टर भी लोकार्पित किए। 24 अप्रैल को प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में पानीपत में राज्यस्तरीय समारोह होना है।
जिनाने शीश कटाया हिन्द दी ख़ातिर, मैं उन्हानु शीश नवाऊँ.. आओ मानवता के सूरज श्री गुरुतेग बहादुर जी के 400वें प्रकाशपर्व को मनाएं... गुरु को शीश नवाएं।
View attached media content
- Manohar Lal (@manoharlalbjp) 6 Apr 2022
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बुधवार को चंडीगढ़ में प्रेस वार्ता कर कहा कि मार्च 2021 से 400वें प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में देश में विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम पहले ही शुरू हो चुके हैं। समारोह के सफल आयोजन के लिए पर्याप्त व्यवस्था की जा रही है।
खेल राज्य मंत्री सरदार संदीप सिंह की अध्यक्षता में इवेंट मैनेजमेंट कमेटी का गठन किया है। गुरु तेग बहादुर जी की शिक्षाएं हमारे लिए दुर्लभ विरासत हैं। 24 अप्रैल को हरियाणा, पंजाब के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश से भी सिख श्रद्धालुओं के बड़ी संख्या में भाग लेने की उम्मीद है।
कार्यक्रम में शामिल होंगे प्रसिद्ध रागी और कथा वाचक
मुख्यमंत्री ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रसिद्ध रागी और कथा वाचकों को समारोह में भाग लेने के लिए विशेष आमंत्रण भेजा जा रहा है। कार्यक्रम प्रबंधन समिति के संयोजक सांसद संजय भाटिया ने कहा कि पिछली सरकारों ने इन महान गुरुओं और संतों की आध्यात्मिक शिक्षाओं और दर्शन का प्रचार करने के लिए कभी नहीं सोचा। संदीप सिंह ने कहा, यह सराहनीय है कि हरियाणा इतने बड़े धार्मिक कार्यक्रम की मेजबानी करेगा।
कश्मीरी पंडितों की बहुत मदद की
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु तेग बहादुर ने न केवल हिंदुओं को जबरन धर्मांतरण से बचाया, बल्कि कश्मीरी पंडितों की भी बहुत मदद की। वे मुगल सम्राट औरंगजेब के दबाव में जीवन जी रहे थे।जब कश्मीरी पंडितों का प्रतिनिधिमंडल अपनी व्यथा बताने गुरु तेग बहादुर जी से मिलने गया, तब उन्होंने कहा था यदि कोई महापुरुष अपना बलिदान दे तभी आपका धर्म बच सकता है।
यह सुन कर 9 वर्ष के बालक गोबिंद राय (गुरु गोबिंद सिंह जी) ने कहा कि पिता जी, आपसे बड़ा महापुरुष और कौन हो सकता है। आप अपना ही बलिदान क्यों नहीं देते। इस पर उन्होंने औरंगजेब से लोहा लेने के लिए दिल्ली कूच किया था, लेकिन चांदनी चौक पर उनका सिर कलम कर दिया गया।