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चंडीगढ़: कर ली वकालत की पढ़ाई, अब बेटियां लड़ेंगी इंसाफ की लड़ाई, यूथ ब्रिगेड जनता को दिलाएगी न्याय

Wed, 27 Oct 2021 10:03 AM IST
प्रमोद कुमार सीमा एस आनंद, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

चंडीगढ़ की बेटियां किसी भी क्षेत्र में आज पीछे नहीं हैं। अधिकारों के प्रति लोगों में जागरूकता लाना भी उनका मकसद है। इसी उद्देश्य के कारण उन्होंने वकालत की पढ़ाई पूरी की है। कुछ युवा वकीलों से उनके मकसद को लेकर बात की गई, तो उन्होंने बताया कि लोगों को हर हाल में इंसाफ मिले, इसी कारण उन्होंने इस पेशे को चुना है। शुरू से ही उनकी रूचि रही है।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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आज ऐसा कोई पेशा नहीं, जिसमें बेटियां अपना परचम न फहरा रही हों। अपने पैरों पर खड़े होकर आत्म सम्मान से जीने की चाह ने बेटियों को परवाज दी है। शिक्षा, विज्ञान, सेना, चिकित्सा, शोध इत्यादि के अलावा पुलिस, प्रशासनिक सेवाओं में भी बेटियों ने अपनी छाप छोड़ी है। ऐसे ही पेशे में वकालत भी जुड़ गया है। शहर की युवा ब्रिगेड इस पेशे के बारे में क्या सोचती है। क्यों इस पेशे को उन्होंने अपनाया। आइए उन्हीं से जानते हैं।

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महिलाएं और बच्चे बात करते हुए झिझकते नहीं
लॉ पूरी कर चुकी मधु वाणी ने बताया कि पहले मैंने नॉन मेडिकल लिया, फिर लगा यह मेरा मुकाम नहीं है। लॉ एक ऐसा क्षेत्र लगा, जो पावरफुल है। इससे आप अपने अधिकारों के बारे में जानकर दूसरे लोगों को भी जागरूक कर सकते हैं। मैं ज्यूडिशियरी की तैयारी भी कर रही हूं। लॉ में 56 विषय पढ़ने पड़ते हैं, जोकि आसान काम नहीं है। पांच-छह साल मेहनत करके कोई भी इसमें अच्छा मुकाम पा सकता है। अदालत आने वाली महिलाएं और बच्चे महिला वकील से अपनी बात आसानी से बेझिझक कह सकते हैं।
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जिला अदालत में प्रैक्टिस से नींव होती है मजबूत
लॉ पूरी कर चुकी मनप्रीत कौर सैनी का कहना है कि कानून की पढ़ाई करके आप ज्यूडिशियरी के अलावा कानूनी सलाहकार, सिविल सेवा में जा सकते हैं। लॉ में बेबाक बोलने की कला, तर्क शक्ति के अलावा आपमें धैर्य होना बहुत जरूरी है। मुझे भीड़ का हिस्सा नहीं बनना था, इसलिए मैंने लॉ चुना। रही बात संघर्ष की तो यह तो हर क्षेत्र में है। इसमें बस एक दिक्कत है कि नए स्टूडेंट्स का कई बार शोषण किया जाता है, जैसे मुंशी वाले काम भी करने पड़ते हैं। मुझे लगता है कि प्रैक्टिस जिला अदालत से ही करनी चाहिए, क्योंकि इससे नींव मजबूत होती है।

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बुआ से प्रभावित होकर यह पेशा चुना
कोमल का कहना है कि मुझे शुरू से ही न्याय पसंद है। मेरी बुआ ने जब लॉ में दाखिला लिया था तो पूरा परिवार उनके खिलाफ था, लेकिन अब जब बुआ कानून मंत्रालय के विधायी विभाग की सचिव हैं, तो सभी उन पर फख्र महसूस करते हैं। मैंने अपनी बुआ से प्रभावित होकर ही लॉ करने का फैसला किया। कोमल चाहती हैं कि वह क्रिमिनल केसों में सभी को न्याय दिला पाएं। जिला अदालत का माहौल बहुत अच्छा है, यहां सभी सहयोग करते हैं, बहुत कुछ सीखने को मिलता है।

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पावरफुल जॉब है वकालत
एलएलबी थर्ड ईयर की छात्रा प्रभजोत का कहना है कि मेरी पृष्ठभूमि अलग थी। मेरे परिवार में सभी कॉमर्स वाले थे। मैं कुछ अलग करना चाहती थी। शुरू में कॉमर्स ले लिया, लेकिन रूचि तो लॉ में थी, इसलिए कानून की कक्षाएं ज्वाइन कीं। तभी महसूस किया कि यह पावरफुल जॉब है। जिला अदालत में इंटर्नशिप करते यह महसूस हो रहा है कि लॉ स्कूल में भी प्रैक्टिकल भी होना चाहिए, इससे लॉ पूरी करके निकलने पर प्रैक्टिस करते समय आसानी होगी।

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