चंडीगढ़। सेक्टर-37 में करोड़ों की कोठी कब्जाने के मामले में गवाह राजीव मनकातला से बचाव पक्ष के वकील की जिरह मंगलवार को पूरी हो गई। इस दौरान सवालों का जवाब देते हुए राजीव अपने ही बयानों में फंसते दिखे। पिछली सुनवाई पर जिला अदालत ने राजीव को कोठी की वसीयत के दस्तावेज पेश करने को कहा था, जिसे वह पेश नहीं कर सके। उन्होंने अदालत से कहा कि दस्तावेज इंग्लैंड में हैं।
बचाव पक्ष के वकील ने बताया कि जिरह के दौरान सवालों के जवाब में गवाह ने कहा कि वह कभी विवादित कोठी में गए ही नहीं, जबकि पिछले बयानों में ही उन्होंने अदालत को बताया था कि वह 2017 में राहुल के पिता के देहांत के समय कोठी में आए थे। उस दौरान सुरजीत और संजीव महाजन से उनकी मुलाकात हुई थी। मंगलवार को मामले के गवाह पीके दास की भी गवाही भी होनी थी, जिसे जिला अदालत ने अगली सुनवाई के लिए टाल दिया। अब मामले की अगली सुनवाई 22 मार्च को होगी।
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राजीव बोला, मेरे नहीं मां के नाम पर है वसीयत
पिछली सुनवाई पर गवाह राजीव ने कोठी में राहुल मेहता, मोहित मेहता, राजीव मनकातला और संजीव मनकातला की 25-25 प्रतिशत की हिस्सेदारी का दावा किया था जबकि मंगलवार को जिरह के दौरान राजीव ने स्वीकार किया कि कोठी की वसीयत राहुल की मां ने उनकी मां के नाम पर की थी। बचाव पक्ष के वकील ने बताया कि कोठी में हिस्सेदारी को लेकर एक मामला अभी भी हाईकोर्ट में लंबित है।
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सुनवाई के दौरान राजीव के दस्तावेज लेने से जज ने किया मना
बचाव पक्ष वकील ने बताया कि जिला अदालत में सुनवाई के दौरान गवाह राजीव ने न्यायाधीश को केस से जुड़े कुछ दस्तावेज सौंपना चाहे लेकिन जज ने उन दस्तावेजों को लेने से इनकार कर दिया। अदालत ने गवाह से कहा कि मामले से जुड़े किसी भी दस्तावेज को पुलिस जांच के दौरान सुपुर्द करना चाहिए था। नियमों के विरुद्ध कोई भी दस्तावेज सीधे अदालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।