शहर की लाइफ लाइन सुखना लेक जलस्तर गिरने के कारण वेंटिलेटर पर है। जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है सुखना में पानी का स्तर निरंतर कम हो रहा है। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का दखल भी सुखना को अभी तक कोई नियमित हल नहीं करवा पाया है। सुखना में पानी के स्त्रोत के लिए मांगे गए सुझाव पर भी काम शुरू नहीं हो पाया है।
ट्यूबवेल के जरिए पाइप लाइन से पानी मिलना भी 20 मार्च से बंद हो चुका है। दो महीने पाइप लाइन से पानी मिलने के बाद भी सुखना को कोई राहत नहीं है। सप्लाई बंद होने के बाद 5 एमएम तक जलस्तर नीचे आ गया है। अब यह पाइप लाइन अगली सर्दियों में विकल्प हो सकती है। 40 से 45 डिग्री तापमान की गर्मी सुखना पर कहर बनकर टूटने वाली है। सुखना लेक में अभी पानी का स्तर 1154.04 फुट है। जबकि सामान्य जलस्तर 1157-58 फुट होना चाहिए। जब पानी 1160 फुट के आसपास होता है तो माना जाता है कि सुखना का जलस्तर काफी अच्छा है।
आप करें सुखना को बचाने की पहल
सूखती सुखना को बचाने के लिए अमर उजाला एक नई सकारात्मक पहल करने जा रहा है। इसमें पाठक वर्ग का सहयोग अपेक्षित रहेगा। सुखना का जलस्तर बढ़ाने के लिए आपके पास भी कोई सुझाव हो सकता है। आप अपना यही जरूरी सुझाव अमर उजाला को seemas@chd.amarujala.com इस ई-मेल आईडी पर भेजिए। हम इस सुझाव को परखने के बाद उपयोगी होने पर प्रशासन तक पहुंचाएंगे।
पहले आ चुके हैं ऐसे सुझाव
सुखना को सूखने से बचाने के लिए हाईकोर्ट ने एमिक्स क्यूरी के जरिए सुझाव मांगे थे। इन सुझावों में से जिन तीन को चुना गया था। उन पर भी अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया है।
ये सुझाव आए...
पारा चढ़ते ही सूखने लगी सुखना
- फोटो : अमर उजाला
सुझाव नंबर-1
सारंगपुर के पास से गुजरने वाली पटियाला की राव का पानी सुखना में लाया जाए। इसके लिए पटियाला की राव से सुखना लेक तक पाइपलाइन बिछाने की योजना है। हालांकि पटियाला की राव में भी ज्यादातर पानी कम ही रहता है। लेकिन बरसाती सीजन में पटियाला की राव में काफी पानी आ जाता है। जो सुखना के जलस्तर को काफी हद तक गिरने से बचा सकती है।
सुझाव नंबर-2
सुखना के कैचमेंट एरिया में ऊपर की तरफ बड़े-बड़े बोरवेल किए जाएं। जरूरत पड़ने पर इन बोरवेल के जरिए सुखना में पानी लाया जा सकता है। इसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि कैचमेंट एरिया में वॉटर लेवल काफी ऊपर है। जिससे वहां कंस्ट्रक्शन जैसे कई तरह केकाम नहीं हो सकते। इन बोरवेल से पानी निकलने के कारण यहां वॉटर लेवल तो कम होगा ही साथ ही सुखना को भी जरूरत पड़ने पर पानी मिलता रहेगा।
सुझाव नंबर-3
चंडीगढ़ में जो टर्सरी वाटर आता है। उसे ट्रीट करके सुखना तक पहुंचाए जाने की योजना थी। सेक्टर-28 में मशीनों की मदद से टर्सरी वॉटर को पहले ही ट्रीट करके देखा जा चुका है। ट्रीटमेंट के रिजल्ट काफी अच्छे रहे थे। इस पानी का बीओडी और सीओडी लेवल बिल्कुल सही पाया गया। ऑक्सीजन लेवल थोड़ा कम रहा है इसे भी पूरा करने पर काम चल रहा है। यह सब होने के बाद पानी में मिले केमिकल और पानी की दुर्गंध खत्म हो जाएगी। यह भी एक विकल्प सोचा गया था।
हिमालय की तलहटी में है सुखना
Sukhna Lake
- फोटो : अमर उजाला
जजों ने कैचमेंट एरिया विजिट कर लिया था जायजा
हाईकोर्ट के जजों ने एमिक्स क्यूरी और दूसरे अधिकारियों के साथ सुखना कैचमेंट एरिया का दौरा किया था। जजों ने खुद ग्राउंड लेवल की हकीकत का अधिकारियों से ब्यौरा मांगा था। सेक्टर-39 के वाटर वर्क्स का दौरा भी किया था। इसके अलावा पटियाला की राव से कनेक्टिविटी के विकल्प को भी मौके पर दौरा कर जाना था।
वीड और गाद भी मुश्किल
पानी का स्तर जैसे-जैसे कम हो रहा है वीड भी ऊपर दिखनी शुरू हो जाएगी। कुछ दिन पहले तक सुखना से वीड निकालने का काम चल रहा था। करीब दो महीने तक वीड निकाली गई। लेकिन जड़ से खत्म नहीं होने के कारण यह फिर से ऊपर आ रही है। इसके अलावा गाद भी बड़ी समस्या है। कई जगह तो गाद की वजह से क्रूज बोट भी फंसने लगी थी। जिस कारण इसका राउंड छोटा करना पड़ा।
हिमालय की तलहटी में है सुखना
3 किमी. वर्ग में फैली सुखना हिमालय की शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी में है। 1958 में सुखना चौ को ही सुखना लेक की शक्ल दी गई। पहले इसमें सीधा बरसाती पानी गिरता था और इस कारण बहुत सी गार इसमें जमा हो जाती थी। इसको रोकने के लिए 25.42 किमी. जमीन पर जंगल लगाया गया। 1974 में इसमें चौ के पानी को दूसरी तरफ मोड़ दिया गया और झील में साफ पानी भरने का प्रबंध किया गया। अब सुखना में गिरने वाले सभी सीवरेज और नालों का पानी बंद कर दिया गया है। जिस कारण बरसात ही पानी का एकमात्र स्त्रोत है। पिछले कई सालों से बरसात भी कम हो रही है। जिस कारण सुखना लगातार सूख रही है। पिछले साल तो चंडीगढ़ में उत्तर भारत में सबसे कम बारिश हुई।