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एनआईए, पुलिस और जेल प्रशासन का तालमेल, जेल की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने पर चर्चा

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चंडीगढ़। बुड़ैल जेल की सुरक्षा व्यवस्था को और पुख्ता किया जाएगा। जेल पीछे दीवार के पास टिफिन बम मिलने के चार दिन बाद आईजी जेल दीपक पुरोहित के नेतृत्व में एक बैठक हुई। इसमें जेल में सीआरपीएफ फोर्स और जेल की दीवार के चारों तरफ पेट्रोलिंग बढ़ाने, जेल के अंदर खेतीबाड़ी की जगह पर ड्रोन कैमरे से नजर रखने पर चर्चा की गई।
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जेल प्रशासन, पुलिस और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) तालमेल कर जेल की सुरक्षा बढ़ाने पर काम कर रही हैं। बैठक में जेल में सीआरपीएफ की एक और कंपनी को सुरक्षा में लगाने की योजना बनाई गई। फिलहाल यहां सीआरपीएफ की एक ही कंपनी तैनात है। एक कंपनी में 130 जवान होते हैं। जेल में कुल आठ वॉच टॉवर हैं। यहां से सीआरपीएफ के जवान जेल की दीवार पर नजर रखते हैं ताकि कोई दीवार फांदकर अंदर न आए या कोई कैदी बाहर न जाए। सीआरपीएफ की क्यूआरटी जेल के बाहर समय-समय पर पेट्रोलिंग करती है। इतनी मुस्तैदी के बावजूद कोई टिफिन बम रखकर फरार हो गया। सूत्रों ने बताया कि जेल की दीवार से बाहर या अंदर आने-जाने पर नजर रखने की जिम्मेदारी सीआरपीएफ की है जबकि अंदर की सुरक्षा का जिम्मा जेल प्रशासन का है। वहीं जेल के बाहर अपराध रोकने की जिम्मेदारी चंडीगढ़ पुलिस की है।
बता दें कि 23 अप्रैल शाम करीब साढ़े 7 बजे जेल के पीछे दीवार के पास कोई बम रखकर फरार हो गया था। बुडै़ल जेल के अंदर ही एनआईए का दफ्तर भी है लेकिन हैरत की बात है कि एजेंसी को भनक तक नहीं लगी। 24 अप्रैल को एनएसजी ने चंडीगढ़ पहुंचकर पौने तीन घंटे की मशक्त के बाद बम को डिफ्यूज किया। इस दौरान तेज धमाके की आवाज भी आई।
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चेकिंग के लिए अंडर व्हीकल सर्च मिरर और एचएचमडी मशीन से चेकिंग की योजना
बैठक में जेल के मुख्य द्वार पर नए उपकरण लगाने की भी योजना बनाई गई। जेल में आने-जाने वालों की जांच के लिए एचएचएमडी मशीन और चारपहिया वाहनों की जांच के लिए अंडर व्हीकल सर्च मिरर लगाने पर चर्चा की गई। जेल के अंदर 201 एचडी कैमरे लगे हैं जबकि जेल की दीवार के बाहर 42 कैमरे लगाने का प्रस्ताव भेजा जा चुका है। जल्द ही ये कैमरे लग जाएंगे।
बम मिलने समय जंगल से निकलकर भागा था एक व्यक्ति
ऑपरेशन सेल के अधिकारियों को जब बम मिला था तो दीवार के साथ लगते जंगल से एक व्यक्ति बाहर निकलकर भागा था। पुलिस ने तुरंत उसका पीछा कर उसे दबोच लिया। पूछताछ में उसने बताया कि वह शौचालय के लिए आया था। पुलिस ने मोबाइल मांगा तो वह नहीं दे रहा था। इस पर ऑपरेशन सेल के प्रभारी अमनजोत सिंह ने उसे थाने ले जाकर पूछताछ करने को कहा। इसके बाद अमनजोत बम मिलने के मामले की जांच में जुट गए। थाने में उस शख्स से कई घंटे पूछताछ के बाद उसे छोड़ दिया गया।
वर्जन
जेल की सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए पुलिस और एजेंसियों के साथ तालमेल कर रहे हैं। घटना से पहले भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीरता से काम किया जा रहा था। कैमरे व अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों से सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी करेंगे।
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-दीपक पुरोहित, आईजी जेल
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