चंडीगढ़। पीजीआई ने अपने फैकेल्टी को नियम कानून ताक पर रखकर टीए-डीए बांटा है। इसका खुलासा पीजीआई की ऑडिट रिपोर्ट में हुआ है। ऑडिट डिपार्टमेंट ने आपत्ति जताते हुए इसे गलत ठहराया है। विभाग ने इसके लिए पीजीआई को स्थिति स्पष्ट करने को भी कहा है। इस पर पीजीआई प्रशासन का कहना है कि सार्क देशों में हुए कॉन्फ्रेंस को राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस की श्रेणी में रखा गया है। इसलिए उसमें शामिल फैकेल्टी को भुगतान किया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि ऑडिट विभाग ने पीजीआई के इस जवाब पर उलटवार करते हुए उनके द्वारा 18 फरवरी 2009 को जारी आदेश का हवाला दिया है, जिसमें पीजीआई ने सार्क देशों को अंतरराष्ट्रीय श्रेणी में रखा है जिससे पीजीआई अपनी ही बातों में फंसकर रह गया है।
ऑडिट डिपार्टमेंट ने 2019-20 की ऑडिट रिपोर्ट में पीजीआई द्वारा सीएल और आरएच के दौरान टूर पर रहे फैकेल्टी को टीए-डीए के नाम पर 31 लाख 97 हजार रुपये के भुगतान पर सवाल खड़े किए हैं। विभाग का कहना है कि पीजीआई ने फंडामेंटल और सप्लीमेंट्री रूल्स को नजरअंदाज कर ऐसा किया है, क्योंकि सार्क देश राष्ट्रीय श्रेणी में शामिल नहीं हैं। वहीं पीजीआई के बनाए गए मानक के अनुसार अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के लिए ग्रांट तय किया गया है। अत: उसका पालन किया जाना चाहिए।
इनसेट
पीजीआई की ओर से तय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस की ग्रांट
- जापान, चीन, साउथ कोरिया, न्यूजीलैंड, ताइवान की कॉन्फ्रेंस के लिए एक लाख रुपये
- थाइलैंड, मलेशिया, सिंगापुर और इंडोनेशिया के लिए 50 हजार रुपये
- पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका के लिए 30 हजार रुपये
- सरकारी एजेंसियों द्वारा आयोजित कॉन्फ्रेंस के लिए 10 हजार रुपये