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Ukraine crisis: यूक्रेन में फंसे लोगों को साहस देने घर पहुंचे अधिकारी, चंडीगढ़ के तीन और लोग सुरक्षित पहुंचे दिल्ली

Wed, 02 Mar 2022 01:29 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ते तनाव की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने दिल्ली हवाई अड्डे पर एक हेल्पडेस्क की स्थापना की है। साथ ही दिल्ली पहुंचने के बाद चंडीगढ़ के लिए परिवहन की व्यवस्था भी प्रशासन मुहैया कराएगा।
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यूक्रेन में विद्यार्थी (फाइल) - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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यूक्रेन में हालात बिगड़ते जा रहे हैं। शहर के कई छात्र अभी भी यूक्रेन में फंसे हुए हैं। उनके परिजनों के दिलों की धड़कन बढ़ रही है। ऐसी स्थिति में प्रशासन और पुलिस के अधिकारी परिजनों के घर जा रहे हैं और केंद्र सरकार की ओर से उनके बच्चों को वापस लाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दे रहे हैं। उनके लोगों के बारे में और अधिक जानकारी हासिल कर उनका हौसला बढ़ा रहे हैं। प्रशासन ने बताया कि चंडीगढ़ के तीन लोग मंगलवार को सुरक्षित दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे।

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विदेश मंत्रालय ने चंडीगढ़ प्रशासन को 103 छात्रों की सूची भेजी है, जो यूक्रेन में फंसे हैं। इसके अलावा प्रशासन भी खुद ऐसे परिवारों की पहचान कर रहा है। सोमवार और मंगलवार को प्रशासन के निर्देश पर क्षेत्रीय थाना प्रभारी संबंधित परिवार के पास पहुंचे और उन्हें साहस बंधाया। इस दौरान पुलिस यूक्रेन में फंसे 49 लोगों के घर गई। इसमें से 17 लोगों के सुरक्षित घर वापस आने की सूचना मिली।

गृह सचिव नितिन यादव ने बताया कि प्रशासन विदेश मंत्रालय और शहर में रह रहे बच्चों के परिजनों के संपर्क में बना हुआ है। परिजनों की हर तरह से मदद की जा रही है और आवश्यक जानकारी उन तक पहुंचाई जा रही है। प्रशासन की तरफ से चंडीगढ़ में बच्चों के माता-पिता से टेलीफोन पर संपर्क किया जा रहा है और टीम भेजकर परिजनों से मुलाकात भी की जा रही है।

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लगातार बढ़ते तनाव के बाद बनाई हेल्पडेस्क

बता दें कि चंडीगढ़ के कुछ छात्र और व्यक्ति भी यूक्रेन से लौटे हैं। उन लोगों ने भी वहां के हालात के बारे में बताया। इसके बाद लोगों की संख्या और दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ते तनाव की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने दिल्ली हवाई अड्डे पर एक हेल्पडेस्क की स्थापना की है। साथ ही दिल्ली पहुंचने के बाद चंडीगढ़ के लिए परिवहन की व्यवस्था भी प्रशासन मुहैया कराएगा।

प्रशासन के हेल्पलाइन नंबर पर अब तक 21 परिजनों ने किया संपर्क
प्रशासन ने पहले ही यूक्रेन में फंसे चंडीगढ़ के छात्रों और अन्य व्यक्तियों की जानकारी एकत्र करने के लिए हेल्पलाइन नंबर 112 की घोषणा कर दी थी, ताकि ऐसे व्यक्तियों की जानकारी विदेश मंत्रालय को भेजी जा सके। इस नंबर पर अब तक 21 परिजनों ने संपर्क किया है और यूक्रेन में फंसे शहरवासी की जानकारी दी है। 112 नंबर पर प्राप्त जानकारियों को विदेश मंत्रालय को भेजा जा रहा है, जो यूक्रेन और आसपास के देशों में दूतावास के साथ साझा किया जा रहा है।

विदेश मंत्रालय से इन नंबरों पर कर सकते हैं संपर्क
  • 1800118797 (टोल फ्री)
  • + 91 1123012113
  • + 91 1123014104
  • + 91 1123017905
  • +91 1123088124 (फैक्स)
  • - ई-मेल के माध्यम से भी कर सकते हैं संपर्क-
  • situationroom@mea.gov.in
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यूक्रेन में फंसे छात्रों के लिए भाजपा ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर
यूक्रेन में फंसे चंडीगढ़ के छात्रों और अन्य लोगों की सूचना एकत्रित करने व उनको बचाने के लिए प्रदेश भाजपा ने एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। लोग हेल्पलाइन नंबर 8699999599 पर संपर्क कर सकते हैं। भाजपा की तरफ से यह जानकारी एकत्रित कर मंत्रालय को दी जाएगी। प्रवक्ता कैलाश चंद जैन ने बताया कि इसके लिए देवेंद्र सिंह बबला के नेतृत्व में एक समिति का भी गठन किया है। समिति में बबला के अलावा प्रदेश प्रवक्ता नरेश अरोड़ा, भाजपा एनआरआई विभाग के संयोजक हरेंद्र सिंह स्लेच, कानूनी प्रकोष्ठ अधिवक्ता रुचि सेखड़ी और पार्षद जसमनप्रीत सिंह शामिल है।

यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों की मदद करने में जुटे हैं डॉ. सुनील
यूक्रेन-रूस के बीच चल रहे युद्ध से पूरा विश्व चिंतित है। यूक्रेन में फंसे अपने नागरिकों की सकुशल देश वापसी का प्रयास जारी है। इसी बीच अपने परिवार से दूर चंडीगढ़ के डॉ. सुनील शर्मा रोमानिया बॉर्डर पर भारतीय छात्रों की सहायता में जुटे हैं। मूलत: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के सरकाघाट के रहने वाले डॉ. सुनील शर्मा भारत में बुकोविनियन स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी, यूक्रेन के अधिकृत प्रतिनिधि हैं।

डॉ. सुनील दि एमडी हाउस, चंडीगढ़ सेक्टर-20 के निदेशक हैं। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध की शुरुआत के साथ देश के छात्रों की सहायता के लिए डॉ. सुनील शर्मा भारत से रोमानिया पहुंचे। वहां बॉर्डर से छात्रों की सकुशल देश वापसी के प्रयास में जुटे हैं। अब तक सैकड़ों छात्रों को देश भेजने में मदद की है। रोमानिया सीमा पर बर्फबारी से छात्रों को काफी परेशानी हुई, जिसके बाद उन्होंने सीमा के दोनों तरफ कैंप लगवा कर छात्रों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाईं।
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