अमूमन जब वार्डबंदी की जाती है तो इस बात का ध्यान रखा जाता है कि वार्ड में पूरा सेक्टर शामिल हो। ऐसा नहीं होना चाहिए कि सेक्टर का आधा हिस्सा एक वार्ड में आता हो और दूसरा किसी दूसरे वार्ड में। नई वार्डबंदी में ऐसा ही हुआ है। सेक्टर-25 का एक हिस्सा वार्ड 13 में है, जबकि दूसरा हिस्सा वार्ड-16 में। सेक्टर-38 का भी एक हिस्सा वार्ड 25 में और दूसरा वार्ड 26 में है। इसी तरह से सेक्टर-45 का एक हिस्सा वार्ड 33 में है और दूसरा हिस्सा वार्ड 34 में। कुछ ऐसे भी वार्ड बनाए गए हैं, जहां सेक्टर के कुछ हिस्से को गांव के साथ जोड़ दिया गया है। इस पर लोग आपत्ति उठा रहे हैं।
इंदिरा और रेलवे कालोनी को एक वार्ड
वार्ड नंबर छह में रेलवे के साथ इंदिरा कालोनी को जोड़ दिया गया है जबकि इनके बीच की दूरी कम से कम डेढ़ से दो किमी की है। यह भी बात लोगों को हजम नहीं हो रही। कैसे एक पार्षद इन दोनों इलाकों को कवर कर पाएगा। हालांकि सूत्रों का कहना है कि इस बारे सोमवार को कुछ लोग आपत्ति दर्ज कराने के साथ कोर्ट का दरवाजा भी खटखटा सकते हैं।
साथ ही कुछ वार्ड में ऐसे नामों का उल्लेख किया गया है, जो फिलहाल अस्तित्व में ही नहीं है। वार्ड नंबर 32 में कालोनी नंबर पांच का जिक्र है, जबकि इसे काफी साल पहले ही खाली करवा लिया गया था। इसी तरह से पंडित कालोनी और नेहरू कालोनी भी अब नहीं हैं। वार्ड 19 का ततारपुर इलाके का नाम भी लोगों ने बहुत कम सुन रखा है।
नई वार्डबंदी में कई खामिया हैं। उन्हें उजागर करने के लिए कांग्रेस पार्टी ने एक टीम बनाई है, जिसमें हरमेल केसरी, अमरजीत गुजराल व पवन शर्मा को शामिल किया गया है। कांग्रेस के पदाधिकारी के साथ यह लोग पेशे से वकील भी हैं। ये सभी बारीकी से मसौदे का अध्ययन कर रहे हैं। इनकी रिपोर्ट आने के बाद पार्टी आपत्ति दर्ज करवाएगी। - सुभाष चावला, पूर्व मेयर व कांग्रेस नेता चंडीगढ़।