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चंडीगढ़ के लिए मेट्रो बढ़िया या मोनो रेल, 13 बाद फिर अगले हफ्ते से शुरु होगा सर्वे

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चंडीगढ़। ट्राइसिटी के लिए मेट्रो मुफीद रहेगी या मोनो रेल, या फिर कुछ और। यह पता लगाने के लिए अगले हफ्ते से सर्वे शुरू हो जाएगा। यूटी प्रशासन ने 13 साल बाद फिर उसी कंपनी को सर्वे का काम सौंपा है, जिसने वर्ष 2009 में शहर में मेट्रो चलाने की संभावनाओं पर रिपोर्ट तैयार की थी। प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल का कहना है कि कंपनी जो भी रिपोर्ट देगी, उसके अनुसार सभी विकल्पों पर चर्चा की जाएगी। विभिन्न मापदंडों पर जो विकल्प खरा उतरेगा, उसे लागू करने की कोशिश रहेगी।
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शहर के मोबिलिटी प्लान को लेकर रेल इंडिया तकनीकी और आर्थिक सेवा (राइट्स) लिमिटेड ने वीरवार को धर्मपाल समेत अन्य अधिकारियों के समक्ष शुरुआती रिपोर्ट पर अपनी प्रस्तुति दी। शुरुआती रिपोर्ट को प्रशासन ने मंजूरी दे दी है। अब कंपनी अगले सप्ताह से चंडीगढ़, मोहाली व पंचकूला में विस्तृत ट्रैफिक एंड ट्रेवल सर्वे शुरू करेगी और मई 2022 तक अपनी फाइनल रिपोर्ट सौंपेगी।
धर्मपाल ने बताया कि शहर के यातायात को कम करने के लिए कौन सा विकल्प बेहतर होगा, इसका पता लगाने के लिए ही यह सर्वे कराया जा रहा है। इससे पहले यूके ने भी प्रोजेक्ट के लिए यूटी प्रशासन को तकनीकी सहायता प्रदान करने का फैसला लिया था। पिछले साल नवंबर में ब्रिटिश डिप्टी हाई कमीशन के अधिकारियों ने प्रशासन को बताया था कि प्रोजेक्ट में 12 माह के लिए यूके की तरफ से फंडिंग की जाएगी। उनका मकसद शहर को कार्बन मुक्त करने के साथ ही क्लाइमेट चेंज एजेंडे में अपना योगदान देना है।
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बस यात्रियों के साथ नए वाहनों के पंजीकरण की संख्या भी देखेगी कंपनी
जानकारी के अनुसार, राइट्स कंपनी वर्ष 2009 से अब तक के बदले पहलुओं को देखते हुए रिपोर्ट तैयार करेगी। इसमें देखा जाएगा कि चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग (सीटीयू) की बसों में रोजाना सफर करने वाले लोगों की संख्या 2009 से अब तक कितनी बढ़ी है। अब रोजाना कितने लोग बसों में सफर करते हैं। रजिस्टरिंग व लाइसेंसिंग अथॉरिटी (आरएलए) और स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (एसटीए) में तब से अब तक रजिस्टर्ड हुए वाहनों की संख्या को भी देखा जाएगा। अब हर दो से ढाई महीने में 15 हजार नए वाहन रजिस्टर्ड हो रहे हैं। इसके अलावा रोजाना चंडीगढ़ में दाखिल होने वाले वाहनों के फ्लो को भी देखा जाएगा। इन सभी पहलुओं को देखते हुए ही ये स्टडी रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
कंपनी बोली- 2009 के मुकाबले ट्रैफिक कई गुना बढ़ा
राइट्स ने वर्ष 2009 में जो सर्वे किया था, उसमें उस वक्त शहर के विभिन्न इलाकों में ट्रैफिक फ्लो आदि के बारे में विस्तृत जानकारी दी थी। किस चौक पर किस वक्त सबसे ज्यादा ट्रैफिक रहता है, यह भी बताया था। राइट्स ने प्रशासन को अर्बन कॉम्प्लेक्स में 2041 तक का ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान का ब्लू प्रिंट सौंपा था। राइट्स कंपनी के साथ प्रशासन के अधिकारियों के साथ ये दूसरी बैठक थी। कंपनी के नुमाइंदों ने प्रशासन को बताया है कि जो सर्वे उन्होंने पहले सौंपा था, वह तब के ट्रैफिक फलो के अनुरूप था। अब परिस्थितियां काफी बदल चुकी हैं। ट्रैफिक कई गुना बढ़ चुका है, लिहाजा उसी के अनुरूप प्लान तैयार करना पड़ेगा। मेट्रो के संबंध में राइट्स की ओर से पहले कहा गया था कि इसे पंचकूला तक बढ़ा दिया जाना चाहिए। इसके बाद राइट्स ने चंडीगढ़ सहित मोहाली व पंचकूला की ओर सर्वे किया था। इस सर्वे में सेक्टर-21 को मेट्रो का आखिरी स्टेशन बताया गया था। मनीमाजरा के हाउसिंग बोर्ड को चंडीगढ़ का आखिरी स्टॉप बताया गया था। मेट्रो प्रोजेक्ट में पांच मेट्रो कॉरिडोर तय किए गए थे। हालांकि अब नए सिरे से पूरा सर्वे किया जाएगा।
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