चंडीगढ़। यूक्रेन-रूस युद्ध का असर आम जनजीवन पर पड़ने लगा है। खाद्य तेलों के दाम 30 रुपये तक बढ़ गए हैं। हालांकि, अभी व्यापारियों के पास पुराना स्टॉक है। यह जंग जारी रही तो और महंगाई की मार झेलनी पड़ सकती है। यूक्रेन सूरजमुखी के तेल का प्रमुख उत्पादक है। देश में वहां से भारी मात्रा में सूरजमुखी का तेल मंगाया जाता है। वहां से इस हालात में इसका आयात संभव नहीं है। कारोबारियों का कहना है कि अभी बाजार में मांग काफी ज्यादा बनी हुई है।
करियाना व्यवसायी एसोसिएशन के अध्यक्ष व सेक्टर-37 के व्यापारी राजेंद्र सिंह ने बताया कि 15 दिन पहले सूरजमुखी का तेल थोक में 142 रुपये लीटर था। मंगलवार को उसके नए दाम 170 रुपये हो गए, वहीं सोयाबीन तेल के दाम थोक में 135 रुपये था, जो अब 167 रुपये लीटर मिल रहा है। अब व्यापारी को इतना महंगा तेल मिलेगा तो वह लोगों से क्या मुनाफा लेगा। सेक्टर-15 के करियाना दुकानदार कृष्ण कुमार ने बताया कि पाम ऑयल एक माह पहले फुटकर में 128 रुपये लीटर था, जो अब 142 रुपये लीटर है। वहीं, रिफाइंड तेल फुटकर में 140 रुपये तक था, जो अभी 160 रुपये तक है। हालांकि, यह पुराने दाम हैं। नए दाम और बढ़कर आएंगे।
जीरा पहुंचा 250 रुपये किलो
राजेंद्र सिंह ने बताया कि एक माह पहले जीरा 190 रुपये किलोग्राम थे, अब यह दाम 250 रुपये किलो तक पहुंच गए हैं। कृष्ण कुमार ने बताया कि सूचना मिली है कि जीरा का निर्यात काफी मात्रा में हो रहा है, इसलिए यहां माल कम आ रहा है।
160 रुपये किलो पहुंची हरी मिर्च
बाजार में हरी मिर्च 160 रुपये किलो बिक रही है। आढ़ती कस्तूरी लाल शर्मा ने बताया कि इस समय मध्यप्रदेश और हावड़ा से ही मिर्ची आ रही है। पहले प्रयागराज से भी मिर्ची आती थी। हालांकि, मांग उतनी ही है। इस बार बारिश के कारण फसल का भी नुकसान हुआ है।
बातचीत-
लोग अभी भी कोरोना महामारी की मार से उबरे नहीं हैं। तेल मसालों में आ रही महंगाई लोगों को मार देगी। सरसों तेल पहले ही तेज था, अब रिफाइंड भी तेज होगा तो लोगों का स्वाद तो वैसे ही खराब हो जाएगा।
- गोल्डी भारद्वाज, गृहिणी, सेक्टर-20
तेल महंगा, मसाले महंगे और सब्जी भी महंगी, आखिर लोग खाएं क्या। आम आदमी के लिए पौष्टिकता से भरपूर थाली अपने परिवार के लिए रखना जैसे चुनौती हो गई है।
- पूजा शर्मा, गृहिणी, सेक्टर-40