केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी, जम्मू और कश्मीर और दिल्ली को राज्यसभा में प्रतिनिधित्व मिलता है। लेकिन लद्दाख, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली - दमन और दीव, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप का राज्यसभा में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है।
राज्यसभा में चंडीगढ़ के लिए एक सीट तय होनी चाहिए। इसको लेकर शहर के सांसद मनीष तिवारी ने संसद में एक विधेयक पेश किया। तिवारी इससे पहले भी चंडीगढ़ के लिए राज्यसभा में एक सीट की मांग कर चुके हैं।
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विधेयक में प्रावधान है कि चंडीगढ़ से राज्यसभा के लिए एक व्यक्ति चुना जाएगा। जिस प्रकार दिल्ली महानगर परिषद ने 1966 से 1990 तक दिल्ली से राज्य परिषद के लिए तीन व्यक्तियों के निर्वाचन के लिए निर्वाचक मंडल के रूप में कार्य किया।
विधेयक में संविधान के अनुच्छेद 80 में संशोधन करने का प्रस्ताव है कि राज्य सभा में चंडीगढ़ के केंद्र शासित प्रदेश का प्रतिनिधि चंडीगढ़ नगर निगम के निर्वाचित सदस्यों से मिलकर बने निर्वाचक मंडल द्वारा चुना जाएगा। वर्ष 2022 में शीतकालीन सत्र के दौरान भी तिवारी ने लोकसभा में यह विधेयक पेश किया था। वो उस समय श्री आनंदपुर साहिब से सांसद थे। उन्होंने कहा था कि चंडीगढ़ के लिए राज्यसभा सीट मांगना उनकी नैतिक जिम्मेदारी है, क्योंकि चंडीगढ़ से उनका भावनात्मक जुड़ाव है।