ऊर्जा दक्षता और पर्यावरणीय स्थिरता के मामले में छह मानकों पर आधारित सूची में केंद्र शासित प्रदेशों में चंडीगढ़ पहले स्थान पर है। नीति आयोग यह सूची जारी की है, जिसमें सिटी ब्यूटीफुल ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इसके पीछे शहर में सौर ऊर्जा का बढ़ता दायरा एक बड़ी वजह है। सरकारी भवनों पर जगह के अनुसार शत प्रतिशत सौर पैनल लगाने की योजना से ऊर्जा की बड़ी बचत हो रही है, वहीं पर्यावरणीय स्थिरता भी बढ़ी है।
केंद्र सरकार की थिंक टैंक नीति आयोग की राज्य ऊर्जा और पर्यावरण सूचकांक (एसईसीआई) में चंडीगढ़ को 55.7 अंक मिले हैं। यह अंक छह मानकों पर मिले हैं। इनमें से चंडीगढ़ को डिस्कॉम प्रदर्शन में 65.6 अंक, सौर ऊर्जा तक पहुंच व उस पर विश्वसनीयता में 58.7 अंक, स्वच्छ ऊर्जा देने की पहल में 69.2 अंक, ऊर्जा दक्षता में 16.2 अंक, पर्यावरणीय स्थिरता में 62.5 और ऊर्जा के क्षेत्र में नई पहल के लिए 14.1 अंक मिले हैं। केंद्र शासित प्रदेशों की सूची में दिल्ली दूसरे स्थान पर है।
92 स्कूलों पर लगाए 5395 किलोवाट के सोलर पैनल
चंडीगढ़ रिन्युअल एनर्जी साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसायटी (क्रेस्ट) ने शहर के 92 स्कूलों पर 5395 किलोवाट के सोलर पैनल लगाए हैं, जिनसे हर साल 70 लाख किलोवाट यूनिट बिजली पैदा होती है। विभाग 26 लाख 26 हजार यूनिट बिजली ग्रिड को देता है। इस कदम से एक ओर शिक्षा विभाग का बिजली का बिल शून्य हो गया है, वहीं 1.31 करोड़ रुपये की बिजली ग्रिड को मिल रही है। क्रेस्ट के चेयरमैन देबेंद्र दलाई का कहना है कि सामान्य तौर पर जो बिजली बनती है, उससे प्रदूषण होता है लेकिन सौर ऊर्जा से बनने वाली बिजली ‘क्लीन एंड ग्रीन एनर्जी’ होती है। इससे कोई प्रदूषण नहीं होता है। शहर में कुल 115 सरकारी स्कूल है।
निगम के सामुदायिक केंद्र व मार्गों पर लगने हैं पैनल
ऊर्जा संरक्षण के लिए नगर निगम अपने सामुदायिक केंद्र की छतों पर सोलर पैनल लगवाने जा रहा है। इसके अलावा मध्य मार्ग और जन मार्ग की स्ट्रीट लाइटों को भी सोलर पैनल से चलाने की तैयारी है। वहीं, सेक्टर-39 के वाटर वर्क्स में भी सोलर पैनल लगना है। क्रेस्ट सौर ऊर्जा को बढ़ाने के लिए लगातार लोगों को जागरूक भी कर रहा है।
चंडीगढ़ के ये भवन पूरी तरह सौर ऊर्जा पर निर्भर
- क्रेस्ट का भवन
- पर्यावरण भवन
- सेक्टर-33 स्थित भाजपा कार्यालय
- शिक्षा विभाग के सभी भवन