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चंडीगढ़ पीजीआई में खुला देश का पहला एम्प्युटी क्लीनिक, अब इलाज के साथ मिलेगी पुनर्वास की सुविधा  

Tue, 02 Feb 2021 10:17 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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पीजीआई के निदेशक प्रो. जगतराम और अन्य डॉक्टर। - फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ पीजीआई में देश के पहले एम्प्युटी क्लीनिक का शुभारंभ हो गया है। क्लीनिक में दुर्घटना में अपने अंग गवा चुके मरीजों के इलाज के साथ पुनर्वास की भी व्यवस्था की गई है ताकि मरीज को दुर्घटना के बाद सामान्य जीवन जीने में कोई परेशानी न हो। 

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पीजीआई निदेशक प्रो. जगतराम ने कहा कि इस क्लीनिक में सबसे पहले मरीज के क्षतिग्रस्त अंग का इलाज किया जाएगा। उसके बाद उसे डॉक्टर की देखरेख में रखने के साथ फिजियोथैरेपी, काउंसिलिंग और पुनर्वास से जुड़ी अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इस क्लीनिक के संचालन का जिम्मा पीजीआई के हड्डी रोग विभाग के पास होगा।


मरीज के साथ परिवार की भी होगी काउंसलिंग
हड्डी रोग विभाग के प्रमुख प्रो. एमएस ढिल्लों ने कही कि दुर्घटना के शिकार मरीज के साथ परिवार के सदस्यों की भी मानसिक स्थिति बिगड़ने लगती है। इन बिंदुओं को शामिल करते हुए क्लीनिक में मरीज के साथ परिजनों की काउंसिलिंग की व्यवस्था की गई है। 
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डॉ. ढिल्लों ने बताया कि ऐसे मरीजों के इलाज की व्यवस्था तो अस्पताल में उपलब्ध होती है, लेकिन इलाज के बाद भी कई अलग-अलग चरणों में महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जो पूरी न होने पर मरीज आगे चलकर मानसिक और शारीरिक दबाव महसूस कर तनाव में चला जाता है। उन अवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए इस क्लीनिक में ऐसे मरीज के इलाज के साथ उसके संपूर्ण फॉलोअप और पुनर्वास से जुड़ी चीजों को एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है। 

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गरीबों का होगा मुफ्त इलाज

प्रो. जगतराम ने बताया कि एम्प्युटी क्लीनिक में गरीब मरीजों का मुफ्त इलाज किया जाएगा। अगर किसी मरीज को सर्जरी के बाद कृत्रिम अंग की जरूरत पड़ी तो पीजीआई उसका खर्चा वहन करेगा। इसके साथ ही पीजीआई पंजाब, हरियाणा, हिमाचल व अन्य राज्यों की सरकारों से ऐसे मरीजों के इलाज में होने वाले खर्च का कुछ हिस्सा मुहैया कराने का भी प्रस्ताव रखेगा। 

पीजीआई में हर साल आते हैं 300 केस
डॉ. ढिल्लो ने बताया कि पीजीआई के एडवांस ट्रामा सेंटर में हर साल लगभग 300 ऐसे केस आते हैं, जिसमें से लगभग 125 मरीज एम्प्युटी के होते हैं। इनके हाथ-पैर काटने पड़ते हैं, लेकिन सर्जरी के बाद आगे के फॉलोअप की प्रक्रियाएं सही तरीके से पूरी न होने के कारण उन्हें दिनचर्या और कार्यक्षेत्र में तमाम कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में उन मरीजों को इस क्लीनिक के माध्यम से सामान्य जीवन जीने का तरीका सिखाया जाएगा। 
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