निगम ने दिल्ली हाईकमीशन की रिपोर्ट के आधार पर 1627 करोड़ रुपये का बजट तो बना लिया। उसमें 500 करोड़ प्रशासन से और 469 करोड़ रुपये राजस्व से आएंगे। यह रकम कुल 969 करोड़ रुपये हुई। अब बचे हुए 558 करोड़ रुपये निगम कहां लाएगा, यह बड़ा सवाल है।
आरएलए निगम के पास आना इतना आसान नहीं
प्रशासक के सलाहकार मनोज परिदा ने आरएलए को नगर निगम को देने की बात कही थी लेकिन आरएलए निगम के पास आना आसान नहीं है। इसके लिए सालों से प्रयास चल रहा है लेकिन अब तक पूरा नहीं हुआ। वहीं, 26 करोड़ रुपये की इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी भी निगम को इस साल मिलनी मुश्किल है क्योंकि इस साल का बजट तैयार हो चुका है। यह भी अगले साल जाकर ही निगम को मिल सकेगा।
निगम ने पिछले साल 1349 करोड़ करोड का बजट तैयार किया था। हालांकि प्रशासन से 425 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। बाद में कोरोना के कारण 20 प्रतिशत बजट में कटौती भी की गई लेकिन निगम के अनुरोध पर पूरा बजट देने का फैसला किया गया। निगम की वित्तीय हालत को देखकर प्रशासन ने 75 करोड़ रुपये और स्वीकृत कर दिए। इस तरह निगम को पिछले वित्तीय वर्ष में कुल 500 करोड़ रुपये मिल गए।
निगम ने इस तरह रखे हैं खर्चे
- बिल्डिंग व रोड - 80 करोड़
- सिविक कार्य - 43 करोड़
- पेयजल आपूर्ति - 55 करोड़
- सीवरेज - 27 करोड़
- स्टॉर्म वाटर लाइन - 8 करोड़
- इलेक्ट्रिसिटी - 6 करोड़
- बागवानी - 15 करोड़
- व्यावसायिक भवन - 23 करोड़
- गांव - 47.25 करोड़
- ईडब्ल्यूएस कॉलोनी - 18.50 करोड़
- माइनर इरिगेशन- 10.25 करोड़
- एमओएच - 24.90 करोड़
- अग्निशमन विभाग - 9.40 करोड़
- ट्रांसपोर्ट- 31 करोड़
- वार्ड डेवलपमेंट फंड - 23.60 करोड़
- स्वच्छ भारत मिशन - 4 करोड़
- आवासीय भवन - 7 करोड़
- प्राथमिक चिकित्सा - 80 लाख