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Chandigarh: चंडीगढ़ के कारोबारी दंपती बनेंगे तीर्थंकर भगवान के माता-पिता, बदल जाएगी पूरी दिनचर्या

Thu, 23 Nov 2023 11:55 AM IST
निवेदिता वर्मा नीरज कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़

सार

सेक्टर 27 के श्री दिगंबर जैन मंदिर में 27 नवंबर से श्री मज्जिनेंद्र जिनबिंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव होगा। यह आयोजन 2 दिसंबर तक होगा। पंचकल्याणक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न प्रांतों और शहरों से श्रद्धालु आएंगे। इसके लिए निमंत्रण भेजा जा रहा है।
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सरोज बाला और राजेंद्र प्रसाद - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
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विस्तार
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चंडीगढ़ के कारोबारी दंपती सरोज बाला और राजेंद्र प्रसाद जैन तीर्थंकर भगवान के माता-पिता बनने जा रहे हैं। उन्हें यह सौभाग्य जीवन में पहली बार मिल रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार प्रतीकात्मक रूप से तीर्थंकर के माता पिता बनने वालों की आगामी जीवनचर्या बदल जाती है। उन्हें ब्रह्मचर्य के पालन के साथ अन्य कई नियमों का अनुसरण करना होता है।

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करीब आठ साल बाद सिटी ब्यूटीफुल में हो रहे इस धार्मिक कार्यक्रम को लेकर जैन समुदाय में हर्ष का माहौल है। सेक्टर 27 के श्री दिगंबर जैन मंदिर में 27 नवंबर से श्री मज्जिनेंद्र जिनबिंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव होगा। यह आयोजन 2 दिसंबर तक होगा। पंचकल्याणक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न प्रांतों और शहरों से श्रद्धालु आएंगे। इसके लिए निमंत्रण भेजा जा रहा है। इसमें भगवान के पांच कल्याणक मनाए जाते हैं। इनमें गर्भ कल्याणक, जन्म कल्याणक, तप कल्याणक, केवल ज्ञान कल्याण और मोक्ष कल्याणक मनाया जाएगा।

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कारोबारी राजेंद्र प्रसाद जैन ने बताया कि हमें और हमारे परिवार में इस बात की बहुत खुशी है कि तीर्थंकर के माता-पिता बनने का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। ऐसे आयोजन बहुत ही कम होते हैं। पूरा परिवार खुश है।

जहां होता है तीर्थंकर का जन्म, वहां नहीं पड़ता अकाल
श्री दिगंबर जैन मंदिर के महामंत्री संत कुमार जैन ने बताया कि जब तीर्थंकर का जन्म होनेवाला होता है तो माता को 16 सपने दिखाई देते हैं। तभी मां को उनके गर्भ में तीर्थंकर के होने का पता चलता है। मान्यता है कि जिस शहर या राज्य में बालक का जन्म होता है वहां गर्भ में आने से छह महीना पहले ही रत्नों की बरसात होती है। भुखमरी और अकाल नहीं होता।

जब तीर्थंकर का जन्म होता है तो देवलोक से इंद्र आते हैं। मायारूपी बालक को सुलाते हैं और तीर्थंकर रूपी बालक को उठाकर ले जाते हैं। देवलोक ले जाकर नमन कर खुशी मनाते हैं। बाद में तीर्थंकर को दोबारा माता के पास रख देते हैं।

यह होगा कार्यक्रम
27 नवंबर को, ध्वजा रोहण और गर्भ कल्याणक कार्यक्रम होगा। इसमें देव आराधना, गुरु आज्ञा, नंदी विधान, घटयात्रा और शोभायात्रा का आयोजन मंदिर से पंडाल तक। शास्त्र प्रवचन होगा।
28 नवंबर को, गर्भ कल्याणक इसमें जाप्यानुष्ठान, श्री जिनाभिषेक, गर्भ कल्याणक पूजा, प्रवचन, शांति हवन गर्भावतरण क्रिया, तीर्थंकर के पिता का दरबार, सोलह स्वप्नों का फल आदि।
29 नवंबर को, जन्म कल्याणक इसमें जाप्यानुष्ठान, अभिषेक, शांतिधारा, तीर्थंकर बालक का जन्म शचि सौधर्म इंद्र संवाद मनोहारी दृश्य जन्म कल्याणक शोभायात्रा, जन्माभिषेक, गुरु भक्ति, भजन एवं आरती, प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रम।
29 नवंबर को, भव्य जैनेश्वरी दीक्षा समारोह का आयोजन।
30 नवंबर को, तप कल्याणक इसमें जाप्यानुष्ठान, अभिषेक, शांतिधारा, नित्य अर्चना, बालक्रीडा, तीर्थकर कुमार का राज्याभिषेक, दोपहर में पिच्छी परिवर्तन समारोह, वैराग्य दर्शन, दीक्षा कल्याणक विधि संस्कार, गुरुभक्ति, भजन आरती और प्रवचन।
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01 दिसंबर को ज्ञान कल्याणक, जाप्यानुष्ठान, अभिषेक, नित्यार्चन, पूजा, मंगल प्रवचन, तीर्थकर महामुनि की आहार चर्चा, केवल ज्ञान संस्कार एवं विद्वान संगोष्ठी, पटटोद्धाटन, समवशरण दर्शन, कैवल्य पूजा, दिव्यदेशना लाभ, गुरु भक्ति आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम होगा।

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