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हिंदी दिवस: गजब है चंडीगढ़ का प्रशासन... बोलता है हिंदी, समझता है अंग्रेजी

Tue, 14 Sep 2021 08:54 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

गृह मंत्रालय के आदेश में साफ कहा गया है कि हिंदी व अंग्रेजी दो भाषाओं में आदेश जारी होने चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। न हिंदी में वेबसाइट, न कोई कार्ययोजना, सूचनाओं से लेकर गरीबों के फार्म तक अंग्रेजी में बांटे जा रहे हैं।
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चंडीगढ़ प्रशासन की वेबसाइट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिंदी के लिए बातें तो बड़ी-बड़ी होती हैं। अफसर सरकारी हो या फिर निजी कार्यक्रम, सभी में हिंदी के विकास की बात करते हैं। लेकिन बात जब खुद पर आती है तो वही अफसर अंग्रेजी में फरमान जारी करते हैं। चंडीगढ़ प्रशासन को ही देख लीजिए। यहां के अफसर हिंदी बोलते हैं, लेकिन समझते अंग्रेजी हैं जबकि गृह मंत्रालय के आदेश में साफ कहा गया है कि हिंदी व अंग्रेजी दो भाषाओं में आदेश जारी होने चाहिए। नीतियां भी हिंदी में बनाएं। विभागों की वेबसाइट पर भी हिंदी में ज्ञान बांटें, लेकिन यह सब हवाई हैं। हद तो तब हो गई जब समाज कल्याण विभाग से जुड़े गरीबों के फार्म तक अफसरशाही ने अंग्रेजी में लिख डाले। आज हिंदी दिवस है। अफसरशाही को आज से ही संकल्प लेना चाहिए कि वह गृह मंत्रालय के आदेशों के मुताबिक दोनों भाषाओं में काम करेंगे। साथ ही गरीबों को हिंदी भाषा में आवेदन मुहैया कराए जाएंगे। 
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गंभीर बनो साहब... आज से भूल-चूक करो माफ
आम बोलचाल में चंडीगढ़ में सबसे ज्यादा हिंदी भाषा का इस्तेमाल किया जाता है। इसके बावजूद हिंदी को लेकर चंडीगढ़ प्रशासन गंभीर नहीं है। किसी भी नीति को लागू करने से पहले प्रशासन शहरवासियों से सुझाव तो मांगता है, लेकिन उसके मसौदे को अंग्रेजी में ही जारी किया जाता है। इसकी वजह से शहर का एक बड़ा वर्ग नीति को समझ पाने में असमर्थ हो जाता है जबकि केंद्र सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा है कि किसी भी सूचना को कम से कम दो भाषाओं में जारी करना अनिवार्य है। समाज कल्याण विभाग, श्रम विभाग समेत कई ऐसे विभाग हैं जिससे गरीब, मजबूर व कम पढ़े-लिखे लोग जुड़े हुए हैं, इनकी वेबसाइट भी अंग्रेजी में है। समाज कल्याण विभाग की कई योजनाएं, जिनके नाम तो हिंदी में हैं, लेकिन उनके फॉर्म अंग्रेजी में हैं। प्रशासन की तरफ से सरकारी विज्ञप्तियां भी अंग्रेजी में ही आती हैं। हिंदी को लेकर प्रशासन कभी गंभीर रहा ही नहीं। 

हिंदी में आए सभी पत्रों का हिंदी में दिया जाए जवाब
राजकीय कार्य हिंदी में करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग ने वर्ष 2021-22 के लिए एक वार्षिक कार्यक्रम जारी किया है। देश के विभिन्न राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को क, ख और ग क्षेत्र में विभाजित किया गया है। चंडीगढ़ को ख क्षेत्र में शामिल किया गया है और सालभर के लिए कई कार्य योजनाएं तय की गई हैं। केंद्र की तरफ से कहा गया है कि हिंदी में प्राप्त पत्रों का उत्तर हिंदी में ही दिया जाना चाहिए। 60 फीसदी प्रशिक्षण कार्यक्रम (अल्पावधि व दीर्घावधि) हिंदी में होने चाहिए। सभी तरह के कोड, मैनुअल फॉर्म, प्रक्रिया और साहित्य का हिंदी अनुवाद किया जाना चाहिए। सभी सूचनाओं को कम से कम दो भाषा में तैयार किया जाना चाहिए। इसमें हिंदी और अंग्रेजी को शामिल किया गया है, लेकिन चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा वर्तमान में सिर्फ अंग्रेजी में ही कार्य किया जाता है।
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कंप्यूटर से लेकर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तक द्विभाषी हों
इस कार्य योजना में इस बात का भी जिक्र है कि कंप्यूटर सहित सभी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की द्विभाषी रूप में खरीद की जानी चाहिए। नागरिक चार्टर, जनसूचना, बोर्डों आदि का प्रदर्शन अंग्रेजी के साथ हिंदी में किया जाना चाहिए। यह भी कहा गया है कि राजभाषा के संबंध में वर्ष में दो बार बैठक की जानी चाहिए ताकि यह देखा जा सके कि हिंदी को बढ़ावा देने के लिए कितना काम किया जा रहा है।  

हिंदी हमारी मातृ भाषा है। चंडीगढ़ में भी हिंदी बोलने वाले लोगों की संख्या काफी ज्यादा है। यूटी प्रशासन हिंदी के प्रसार के क्षेत्र में केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत काम कर रहा है। जन सूचनाएं अंग्रेजी के साथ हिंदी और पंजाबी में भी दी जानी चाहिए। इस पर हम काम कर रहे हैं। - धर्मपाल, सलाहकार, यूटी प्रशासक 

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