राइट्स ने वर्ष 2009 में जो सर्वे किया था, उसमें उस वक्त शहर के विभिन्न इलाकों में यातायात के दबाव आदि के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई थी। किस चौक पर किस वक्त सबसे ज्यादा यातायात रहता है, यह भी बताया था। राइट्स ने प्रशासन को अर्बन कांप्लेक्स में 2041 तक का यातायात प्रबंधन योजना का ब्लूप्रिंट सौंपा था। सोमवार की प्रस्तुति के दौरान कंपनी के नुमाइंदों ने बताया कि जो सर्वे उन्होंने पहले सौंपा था, वह तब के यातायात दबाव के अनुरूप था। अब परिस्थितियां काफी बदल चुकी हैं। ट्रैफिक कई गुना बढ़ चुका है, लिहाजा उसी के अनुरूप प्लान तैयार करना पड़ेगा। मेट्रो के संबंध में राइट्स की ओर से पहले कहा गया था कि इसे पंचकूला तक बढ़ा दिया जाना चाहिए। इसके बाद राइट्स ने चंडीगढ़ सहित मोहाली व पंचकूला की ओर सर्वे किया था। इस सर्वे में सेक्टर-21 को मेट्रो का आखिरी स्टेशन बताया गया था। मनीमाजरा के हाउसिंग बोर्ड को चंडीगढ़ का आखिरी स्टॉप बताया गया था। मेट्रो प्रोजेक्ट में पांच मेट्रो कॉरिडोर तय किए गए थे।
चंडीगढ़ में मेट्रो का सफर
- वर्ष 2009 में मेट्रो परियोजना के लिए राइट्स को सलाहकार कंपनी के तौर पर नियुक्त किया गया
- रिपोर्ट सौंपने के बाद वर्ष 2010 में दिल्ली मेट्रो को डीपीआर का काम मिला
- वर्ष 2012 दिल्ली मेट्रो ने डीपीआर तैयार की
- वर्ष 2014 एमओयू साइन के लिए बैठक
- वर्ष 2016 में सांसद किरण खेर ने मेट्रो प्रोजेक्ट पर सवाल उठाया
- वर्ष 2018 में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इसे घाटे का सौदा बताकर प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में डाल दिया
- कुल खर्च : करीब 10 करोड़