कॉलेज शिक्षकों की रिटायरमेंट की उम्र को 58 से बढ़ाकर 65 करने के आदेश का यूटी प्रशासन ने पालन कर दिया है। 58 की उम्र में (एक्सटेंशन के साथ 60) रिटायर्ड शिक्षकों को वापस सेवा में ले लिया गया है और सेवानिवृत्ति से लेकर दोबारा सेवा में लेने की अवधि के सभी लाभ उन्हें दिए जाएंगे। यह जानकारी इस मामले को लेकर दाखिल अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान यूटी प्रशासन ने दी। इस जानकारी पर हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया।
कॉलेज प्रोफेसरों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए कहा था कि उनकी रिटायरमेंट की आयु 58 वर्ष ही रखी गई है, जबकि यूजीसी के अनुसार इसे 65 वर्ष किया जाना चाहिए। याची ने बताया था कि उन्हें 2 वर्ष की एक्सटेंशन देकर 60 वर्ष की उम्र में रिटायर कर दिया गया। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद गत वर्ष एक मार्च को सुनाए अपने फैसले में कहा था कि चंडीगढ़ में कॉलेज शिक्षकों की रिटायरमेंट की आयु 65 वर्ष होगी। इस फैसले के खिलाफ चंडीगढ़ प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की थी।
सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिलने के बाद यूटी प्रशासन ने दिसंबर 2021 में अपील को वापस ले लिया था। अपील वापस लेने के बावजूद लगातार प्रशासन हाईकोर्ट के आदेश का पालन करने में देरी कर रहा था। पिछली सुनवाई पर कोर्ट में आदेश का पालन करने के लिए समय दिए जाने की मांग की थी। याची ने कहा था कि आदेश का पालन करने के स्थान पर प्रशासन फाइल को एक विभाग से दूसरे विभाग में भेज रहा है।
आदेश के खिलाफ अपील वापस ले ली गई है तो हाईकोर्ट के आदेश का पालन करने में अनावश्यक देरी क्यों की जा रही है। पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि यदि आदेश का पालन नहीं किया गया तो अगली सुनवाई पर प्रशासन के सलाहकार को खुद हाजिर होकर जवाब देना होगा।
मामला सुनवाई के लिए पहुंचा तो प्रशासन ने बताया कि रिटायर किए गए कॉलेज शिक्षकों को सेवा में ले लिया गया है। साथ ही सेवानिवृत्त करने के बाद से लेकर दोबारा सेवा में लेने की अवधि का उन्हें वित्तीय व अन्य लाभ दिया जाएगा। जिन शिक्षकों ने प्रमोशन का दावा किया है उन पर विचार किया जाएगा और लंबित राशि पर ब्याज को लेकर भी निर्णय लिया जाएगा। इस जानकारी पर हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया।