पंजाब विश्वविद्यालय में आरक्षण नीति लागू हो गई है। अब विश्वविद्यालय के एससी, एसटी कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ मिल पाएगा। इससे पहले आरक्षण का लाभ नहीं दिए जाने पर पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग ने सरकार को अनुदान रोकने के निर्देश जारी किए थे, जिसके बाद विश्वविद्यालय में यह पॉलिसी लागू की है।
पंजाब विश्वविद्यालय एससी, एसटी, बीसी इंप्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग को शिकायत की गई थी कि पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ में एससी, एसटी कर्मचारियों की पदोन्नतियों के अवसर पर नियम के अनुसार पंजाब सरकार की आरक्षण पॉलिसी लागू नहीं की जाती। इसके बाद आयोग द्वारा एक्ट 2004 की धारा 10(2) के अधीन रजिस्ट्रार पंजाब यूनिवर्सिटी से शिकायत संबंधी सूचना मांगी गई, लेकिन आयोग को स्पष्ट उत्तर नहीं दिया गया।
विश्वविद्यालय द्वारा जवाब दिया गया कि पीयू एक स्वायत्त संस्था है। इसकी सीनेट ही ऐसे निर्णय लेने में समर्थ है। इसके बाद आयोग द्वारा 16 मार्च, 2021 को पीयू के रजिस्ट्रार को लिखा कि जो संस्था पंजाब राज्य से कोई भी अनुदान प्राप्त करती है, वहां आरक्षण पॉलिसी यथावत लागू होनी चाहिए।
एक साल का समय बीतने के बाद भी पीयू द्वारा आरक्षण पॉलिसी लागू नहीं करवाई गई, जिसके बाद आयोग द्वारा पंजाब सरकार को पीयू का अनुदान बंद करने के लिए निर्देश जारी किए गए। आयोग के इस फैसले के बाद पीयू में पदोन्नति आरक्षण पॉलिसी लागू कर दी गई है। पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य ज्ञानचंद दिवाली ने बताया कि सतीश पाटिल, डिप्टी रजिस्ट्रार (एस्टेबलिशमेंट), पंजाब यूनिवर्सिटी द्वारा आयोग के समक्ष पेश होकर पंजाब सरकार की पदोन्नति में आरक्षण पॉलिसी को यथावत लागू करने के लिए सहमति प्रकट कर दी है।