गौरतलब है कि पिछले साल 29 सितंबर को जरनैल सिंह भिंडरावाला के गांव रोडे में जब अमृतपाल ने वारिस पंजाब दे संगठन का कार्यभार संभालने के साथ ही वहां आयोजित समारोह में खुद को जरनैल सिंह भिंडरांवाला का अनुयायी बताते हुए सिख युवाओं को अगली जंग के लिए तैयार होने का आह्वान किया था। इसके तुरंत बाद खुफिया एजेंसियों ने अमृतपाल की गतिविधियों और उनसे जुड़ने वाले लोगों पर नजर रखनी शुरू कर दी थी। इसकी पुष्टि करते हुए डीजीपी यादव और अन्य अधिकारियों ने भी केंद्रीय एजेंसियों से इनपुट मिलने की बात कही थी। बावजूद इसके पुलिस और राज्य सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया।
डीजीपी यादव ने गृह मंत्री के समक्ष उठाया था मुद्दा
नई दिल्ली में 22 जनवरी को आयोजित सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों के अखिल भारतीय वार्षिक सम्मेलन में पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने 'खालिस्तान उग्रवाद- पंजाब में संचार और रसद नेटवर्क' विषय पर प्रस्तुति देते हुए अमृतपाल सिंह द्वारा चलाई जा रही खालिस्तान संबंधी मुहिम का उल्लेख किया था। इस सम्मेलन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी भी मौजूद थे लेकिन डीजीपी यादव द्वारा उठाए गए मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया गया। इसका एक कारण यह भी रहा कि दिसंबर माह के दौरान पंजाब में नशा तस्करी और किसानों के विभिन्न मोर्चे अहम मुद्दे बने रहे। 'बंदी सिंहों' की रिहाई का मोर्चा शुरु होने के बाद केंद्र सरकार का ध्यान भी इस ओर गया और मोहाली-चंडीगढ़ बैरियर पर मोर्चा समर्थकों के पुलिस पर हमले के बाद केंद्र ने राज्य सरकार से रिपोर्ट तलब की थी। अब केंद्र ने अजनाला कांड की रिपोर्ट मांगी है।