पंजाब सरकार ने तीन माह बीत जाने के बाद भी केंद्र सरकार को यह जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है कि सूबे में अवैध हथियारों का प्रसार कैसे हो रहा है और गैंगस्टरों तक अवैध हथियार कैसे पहुंचते हैं? गृह मंत्रालय के इंटर स्टेट काउंसिल सचिवालय की ओर से पंजाब के मुख्य सचिव को भेजे पत्र में पंजाब सरकार से पूछा गया है कि सूबे की जेलों में बंद गैंगस्टरों द्वारा अपने विदेशी मददगारों के जरिये अंतरराज्यीय सीमा पार अपराध कैसे किए जा रहे हैं? राज्य सरकार से यह जानकारी भी देने को कहा गया कि विदेश भाग चुके अपराधियों, गैंगस्टरों के प्रत्यर्पण के लिए भारत सरकार को विभिन्न देशों के लिए दिए कितने प्रस्ताव लंबित हैं? इसके अलावा सजायाफ्ता कैदियों को एक राज्य से दूसरे राज्य में ट्रांसफर करने के लिए, सुरक्षा की दृष्टि से राज्यों के बीच कितना सहयोग किया जा रहा है? गृह मंत्रालय ने यह भी जानना चाहा है कि सूबे की सभी जेलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये कैदियों की सुनवाई के लिए पर्याप्त सुविधाएं जुटा ली गई हैं या नहीं?
गौरतलब है कि आगामी 31वीं उत्तर क्षेत्रीय परिषद की बैठक में शामिल किए जाने वाले विभिन्न 26 मुद्दों में से 9 पर गृह मंत्रालय ने पंजाब से विस्तृत जवाब देने को कहा था लेकिन राज्य सरकार की ओर से अब तक गृह मंत्रालय को कोई जानकारी नहीं भेजी है। गृह मंत्रालय के ताजा पत्र में पंजाब सरकार को उपरोक्त मुद्दों पर जल्द से जल्द जवाब भेजने की ताकीद की गई है, ताकि इस मुद्दों पर केंद्र सरकार का सहयोग लिया जा सके।
विशेष बात यह है कि उपरोक्त सभी मुद्दों को पंजाब सरकार द्वारा ही उत्तर क्षेत्रीय परिषद में उठाने का फैसला लिया गया है लेकिन अब राज्य सरकार ही इन मुद्दों पर तथ्य साझा नहीं कर रही।
मुख्यमंत्री भगवंत मान की ओर से पिछले महीने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के दौरान, सीमावर्ती राज्य का हवाला देते हुए पंजाब में सीमापार से हथियारों व ड्रग की तस्करी, अपराधियों और गैंगस्टरों को मिल रही विदेशी मदद और विदेश में छिपे आतंकियों द्वारा सूबे में माहौल खराब करने के प्रयासों की रोकथाम के लिए सहयोग की मांग की गई थी। इन्हीं मुद्दों को उत्तर क्षेत्रीय परिषद की बैठक में उठाने का फैसला लिया गया था।