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कपास किसानों को झटका: केंद्र सरकार ने 43 रुपये बढ़ाया बीज का दाम, अब 810 रुपये प्रति पैकेट करना होगा भुगतान

Mon, 18 Apr 2022 10:11 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

पंजाब के मालवा क्षेत्र में सबसे अधिक किसान कपास की खेती से जुड़े हैं। इनमें बठिंडा, मानसा, फरीदकोट, अबोहर, फिरोजपुर, बरनाला, मुक्तसर और फाजिल्का जिले शामिल हैं। यहां के काश्तकार कृषि विविधीकरण के तहत कपास की खेती से जुड़े हैं।
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कपास - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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पंजाब में कपास की खेती करने वाले किसानों को केंद्र सरकार ने बड़ा झटका दिया है। लगातार दूसरे साल कपास के बीजों के दामों में बढ़ोतरी कर दी है। पिछले साल 767 में मिलने वाला बीज का पैकेट अब 810 रुपये का हो गया है। अब किसानों को एक पैकेट पर 43 रुपये ज्यादा खर्च करने होंगे। एक एकड़ में कम से कम तीन पैकेट बीज की खपत होती है।

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पंजाब में कपास की खेती करने वाले किसान 2021 में पिंक बॉलवर्म के प्रकोप से आर्थिक नुकसान में हैं। ऐसे में बीजों की कीमतों में वृद्धि करने से राज्य के कपास उत्पादक किसानों को केंद्र सरकार ने एक और झटका दे दिया है। कुछ कपास उत्पादकों ने बताया कि सरकार हर साल बीज की कीमतों में वृद्धि कर रही है। इससे उनकी फसल की लागत लागत बढ़ गई है। 

केंद्र की सरकार ने पिछले साल भी बीज के दामों में वृद्धि की थी, जो कपास के बीज की कीमत 737 रुपये थी उसे बढ़ाकर 767 रुपये कर दिया था। पिछले साल और इस साल की वृद्धि देखें तो दो साल में 73 रुपये की वृद्धि है। कपास की खेती करने वाले किसानों ने अफसोस जताया कि वे पिंक बॉलवर्म के कारण हुए नुकसान से मुश्किल से उबर पाए हैं, जिससे बड़े क्षेत्र में फसल को नुकसान पहुंचा है। अब कपास के बीज की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी से उन पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।
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अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी मांग
कपास की अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग बढ़ी है, जिसे देखते हुए निजी कंपनियों ने एमएसपी से कहीं ज्यादा कपास की खरीदारी की है। राज्य की कुछ मंडियों में कपास की कीमत 12,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंची है जबकि केंद्र ने 6,025 रुपये एमएसपी तय की गई है।

मालवा में सबसे अधिक खेती
पंजाब के मालवा क्षेत्र में सबसे अधिक किसान कपास की खेती से जुड़े हैं। इनमें बठिंडा, मानसा, फरीदकोट, अबोहर, फिरोजपुर, बरनाला, मुक्तसर और फाजिल्का जिले शामिल हैं। यहां के काश्तकार कृषि विविधीकरण के तहत कपास की खेती से जुड़े हैं।

केंद्र का रवैया कृषि विविधीकरण मुहिम को झटका है। केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से किसानों को फसल विविधीकरण का विकल्प चुनने की सलाह दी जाती है लेकिन जब वह अन्य फसलों की खेती शुरू करते हैं तो उन्हें सरकारों की ओर से मुश्किल वक्त में कोई सहायता नहीं दी जाती है। - सुखदेव सिंह कोकरीकलां, किसान नेता

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