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चंडीगढ़: केंद्र से 20 प्रतिशत बजट काटने के आदेश, निगम को कर्मचारियों को वेतन देना भी होगा मुश्किल

Mon, 19 Jul 2021 02:36 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

चंडीगढ़ नगर निगम साल में 480 करोड़ रुपये नियमित, आउटसोर्स, कॉन्ट्रेक्ट, डेलीवेजेज कर्मचारियों के वेतन एवं पेशन पर खर्च करता है। इसके अलावा 150 करोड़ रुपये वाटर वर्क्स, ट्यूबवेल, स्ट्रीट लाइट के बिलों, रोड रिकार्पेटिंग पर 55 करोड़ और पेयजल आपूर्ति पर लगभग 50 करोड़ रुपये खर्च होता है।
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चंडीगढ़ नगर निगम। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चंडीगढ़ नगर निगम की चुनौतियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। केंद्र से हाल ही में एक पत्र जारी कर कहा गया है कि सभी विभागों के बजट में 20 प्रतिशत की कटौती कर दी जाए। निगम पहले ही वित्तीय समस्या से जूझ रहा है, ऐसे में 20 प्रतिशत कटौती के बाद कर्मचारियों को वेतन देना मुश्किल हो जाएगा। इसी कारण निगम की 125 करोड़ की किस्त को अटकाया गया है। इसके लिए प्रशासक वीपी सिंह बदनौर और उनके सलाहकार धर्मपाल के साथ वित्तीय और योजना अधिकारी बैठक करेंगे। उसके बाद कुछ तय होगा।  

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नगर निगम ने साल 2021-22 के लिए 1641 करोड़ का बजट पास किया था। चतुर्थ दिल्ली वित्त आयोग के अनुसार निगम ने प्रशासन से 1176 करोड़ ग्रांट इन एड में मांगे थे। असल में यह बजट 967 करोड़ का ही था। शेष बजट आयोग की रिपोर्ट के आधार पर बना था। इसके एवज में प्रशासन से निगम को 502 करोड़ रुपये का बजट जारी किया था। मांगे गए बजट में से पहले ही 674 करोड़ रुपये कम हो गए थे। प्रशासन ने निगम को 125 करोड़ के हिसाब से चार किस्त में बजट देने की बात कही। दूसरी किस्त के लिए निगम प्रशासन को पत्र लिख चुका है, लेकिन किस्त अब तक जारी नहीं हुई है। ऐसे में केंद्र से आई चिट्ठी ने अधिकारियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। क्योंकि इस कटौती से निगम की हालत काफी ज्यादा खराब हो जाएगी।


82 करोड़ रुपये ही बचेंगे विकास कार्य के लिए   
नगर निगम साल में 480 करोड़ रुपये नियमित, आउटसोर्स, कॉन्ट्रेक्ट, डेलीवेजेज कर्मचारियों के वेतन एवं पेशन पर खर्च करता है। इसके अलावा 150 करोड़ रुपये वाटर वर्क्स, ट्यूबवेल, स्ट्रीट लाइट के बिलों, रोड रिकार्पेटिंग पर 55 करोड़ और पेयजल आपूर्ति पर लगभग 50 करोड़ रुपये खर्च होता है। लॉयंस कंपनी को हर साल 54 करोड़ दिया जाता है। असल में निगम के पास 193 करोड़ रुपये ही जरूरी कामों के लिए बचता है। इसमें 469 करोड़ 78 लाख निगम अपने संसाधनों से जुटाता है। हाल ही में पानी के दाम कम करने के बाद निगम को 90 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च करने होंगे। ऐसे में निगम के पास काम के लिए 103 करोड़ रुपये ही बचते हैं। इसमें से 20 प्रतिशत कट हो जाएं तो लगभग 82 करोड़ रुपये ही निगम के पास रह जाएगा।
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संपत्ति कर सहित लाइसेंस फीस में रियायत देने पर चल रहा विचार
मेयर रविकांत शर्मा ने हाल ही में एक कमेटी बनाई है, जो कोरोना महामारी के कारण लोगों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए 50 प्रतिशत तक संपत्ति कर में छूट देने पर फैसला करेगी। साथ ही वेंडरों को लाइसेंस फीस माफ करने में भी मदद करेगी। निगम आयुक्त पहले ही बता चुके हैं निगम अब इस स्थिति में है कि वार्ड फंड तक के कार्य रोकने पड़ेंगे। ऐसे में किसी को रियायत देना निगम के लिए बड़ी चुनौती होगी।

केंद्र से पत्र मिला है। फिलहाल 125 करोड़ के बारे में कुछ नहीं कह सकता हूं, लेकिन बजट में कटौती के लिए प्रशासक व उनके सलाहकार के साथ बैठक करेंगे। उसके बाद तय करेंगे कि किस विभाग के बजट में कटौती करनी है और किसे रियायत देनी है। -अश्वनी डोगरा, वित्तीय और योजना अधिकारी

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