सीएम भगवंत मान ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री से मुलाकात की।
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लंबी जद्दोजहद के बाद आखिरकार सोमवार को केंद्र सरकार ने अपने उस फैसले को वापस ले लिया, जिसके तहत झारखंड की खदानों से पंजाब के थर्मल प्लांटों तक पहुंचने वाला कोयला समुद्री रास्ते से लाया जाना था। इस मामले में हाल ही में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्रीय बिजली मंत्री आरके सिंह से मुलाकात कर आग्रह किया था। मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर केंद्रीय बिजली मंत्री आरके सिंह से मुलाकात कर ओडिशा से कोयला समुद्र के रास्ते पंजाब लाने की शर्त हटाने पर आभार व्यक्त किया है और गर्मी में मध्य प्रदेश से सोलर बिजली की आपूर्ति और पछवाड़ा कोयला खान की क्षमता बढ़ाने पर भी चर्चा की गई... इस बार की गर्मियों में बिजली की कमी नहीं होने दी जाएगी।
केंद्रीय कोयला मंत्रालय और बिजली मंत्रालय ने झारखंड की पछवाड़ा खदानों से पंजाब तक कोयला पहुंचाने के लिए आर-एस-आर (रेल-शिप-रेल) मार्ग अपनाने का फैसला किया था। इसके तहत खदानों से कोयले को रेल के जरिए पारादीप बंदरगाह तक फिर समुद्री जहाज के जरिए गुजरात के मुंद्रा पोर्ट तक और फिर मुंद्रा पोर्ट से रेल के जरिए 4360 किलोमीटर की दूरी तय करके पंजाब लाया जाना था।
यह पूरा मार्ग श्रीलंका से घूमकर गुजरता है। इस मार्ग से पंजाब तक कोयला पहुंचने में 20-25 दिन का समय लगता। इससे ढुलाई का खर्च बढ़कर 1.4 फीसदी हो जाता। इसके साथ ही बिजली उत्पादन की लागत भी डेढ़ गुना बढ़ जाती। पंजाब सरकार पिछले साल से ही इस मसले को केंद्र सरकार के समक्ष उठाया जा रहा था लेकिन रेल रैकों की कमी का हवाला देते हुए केंद्र सरकार अब तक सीधे रेल मार्ग से कोयले की ढुलाई से इंकार करती रही थी।