केंद्र के फैसले से पंजाब को लगा झटका
केंद्र के इस फैसले से पंजाब सरकार को झटका लगा है। राज्य सरकार ने केंद्र से गुहार लगाई थी कि बिना किसी मूल्य कटौती के गेहूं खरीद के नियमों में ढील दी जाए। जाहिर है कि पंजाब में बेमौसमी बारिश, अंधड़ और ओलावृष्टि के कारण गेहूं की फसल के लिए सबसे मुख्य समस्या यह रही है कि गेहूं के दाने भीगकर अपनी चमक गंवा चुके हैं। गेहूं के दानों में नमी भरी है और पानी में डूबी फसल का दाना काला पड़ चुका है। इन परिस्थितियों में भी केंद्र ने सारा गेहूं खरीदने का तो एलान किया लेकिन खराब हुए प्रत्येक दाने का पैसा काटा जाएगा।
पंजाब की मंडियों में पहुंचा 8152 टन गेहूं
पंजाब की मंडियों में सोमवार तक 8152 टन गेहूं पहुंच चुका था, जिसमें से केवल 18 फीसदी फसल की ही खरीद हो सकी है। किसान और सरकार केंद्र से खराब फसल पर मिलने वाली राहत के इंतजार में भी खरीद कार्य में ढिलाई बरत रहे थे। राज्य भर में जारी विशेष गिरदावरी के अब तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, इस बार खराब मौसम के कारण 14.57 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है। ज्यादातर खेतों में फसलें बिछ गई हैं और जिन खेतों में अब तक पानी जमा है, वहां गेहूं के दाने काले पड़ गए हैं जबकि कई जगह भीग चुकी फसल को धूप लगने के बाद गेहूं के दाने सफेद हो गए हैं। आंकड़ों के अनुसार, गेहूं के दाने इस बार 35-80 फीसदी तक चमक खो चुके हैं।
केंद्र के नए फैसले के तहत इतनी होगी कटौती
- गेहूं की चमक 10 फीसदी कम रहने पर कोई कटौती नहीं
- चमक 10-80 फीसदी तक कम रहने पर 5.31 रुपये प्रति क्विंटल कटौती
- सूखे व टूटे दानों 6 फीसदी तक रहने पर कोई कटौती नहीं
- 6-8 फीसदी टूटे व सूखे दानों पर 5.31 रुपये प्रति क्विंटल कटौती
- 8-10 फीसदी टूटे व सूखे दानों पर 10.62 रुपये प्रति क्विंटल कटौती
- 10-12 फीसदी टूटे व सूखे दानों पर 15.93 रुपये प्रति क्विंटल कटौती
- 12-14 फीसदी टूटे व सूखे दानों पर 21.25 रुपये प्रति क्विंटल कटौती
- 14-16 फीसदी टूटे व सूखे दानों पर 26.56 रुपये प्रति क्विंटल कटौती
- 16-18 फीसदी टूटे व सूखे दानों पर 31.87 रुपये प्रति क्विंटल कटौती
भंडारण में खराब हुई फसल की जिम्मेदारी राज्य की
केंद्र सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि खरीदे जाने वाले खराब गेहूं की फसल को अलग से स्टोर किया जाए और भंडारण के दौरान इस तरह की फसल की गुणवत्ता में और कोई गिरावट हुई तो उसके लिए राज्य सरकार जिम्मेदार होगी। खराब और मामूली खराब फसल 6 फीसदी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।