दरअसल, नवजोत सिंह सिद्धू के प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष पद संभालने के बाद मुख्यमंत्री से पहली मुलाकात के दौरान मांगों की जो फेहरिस्त रखी गई थी, वह मामला हाईकमान तक पहुंच गया था। हाईकमान ने भी सिद्धू द्वारा कैप्टन सरकार के कामकाज पर सार्वजनिक तौर पर उंगली उठाने को गलत ठहराया गया था। इस बीच सिद्धू जहां चार कार्यकारी अध्यक्षों के साथ जिला स्तर पर मेल-मिलाप अभियान जारी रखे हुए हैं, उससे यह साफ हो गया है कि प्रदेश में कांग्रेस सिद्धू और कैप्टन खेमों में बंटती जा रही है।
हालांकि कैप्टन साफ कर चुके हैं कि वह और सिद्धू मिलकर काम करेंगे लेकिन उन्होंने यह भी साफ कर दिया है कि सिद्धू पार्टी चला रहे हैं और वह सरकार। इसका सीधा अर्थ यह लगाया गया है कि कैप्टन अपनी सरकार में सिद्धू का दखल नहीं चाहते। वैसे कैप्टन का यह भी कहना था कि पार्टी और सरकार को एक टीम के तौर पर काम करना चाहिए।
दूसरी ओर, मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें तेज होते ही प्रदेश कांग्रेस में हलचल फिर तेज हो गई है। ऐसे विधायक जो लंबे समय से मंत्री की कुर्सी की आस लगाए बैठे थे, की उम्मीद जग गई है क्योंकि माना जा रहा है कि कैप्टन अपने मंत्रिमंडल से उन मंत्रियों की छुट्टी कर सकते हैं, जिन्होंने मुख्यमंत्री के खिलाफ मुहिम में नवजोत सिद्धू का खुलकर साथ दिया। ऐसे मंत्रियों की संख्या चार से अधिक है, इसलिए विधायकों की कतार बड़ी होने जा रही है, जिसके बारे में मंगलवार तो स्थिति साफ होने लगेगी। इस बीच, मंत्रिमंडल विस्तार के अलावा मुख्यमंत्री अपने कई मंत्रियों के विभागों फेरबदल भी कर सकते हैं।