पंजाब यूनिवर्सिटी के वीसी अरुण ग्रोवर रविवार को हुई बैठक में भड़क गए और उन्होंने सीनेट-सिंडीकेट पर जमकर भड़ास निकाली। सीनेट बैठक शुरू होने के कुछ देर बाद ही सभी मुद्दों को छोड़कर हाईकोर्ट में वीसी प्रो. अरुण कुमार ग्रोवर की तरफ से दाखिल एफिडेविट पर बहस शुरू हो गई। सभी सीनेट सदस्य अड़े रहे और कुछ गुजारिश भी करते रहे कि वीसी अपना एफिडेविट वापस लें। पांच घंटे तक हंगामा, कई तरह के आरोप और दलीलें सुनने के बाद वीसी प्रो. ग्रोवर ने अपना पक्ष रखा।
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वीसी ने कहा कि देश में कोई ऐसी यूनिवर्सिटी देखी है, जिसके वीसी के साथ ऐसा बर्ताव होता हो जैसा उनके साथ होता है? सीनेट सदस्यों को वीसी ने कहा कि आपके बीच से ही एक सदस्य ने उन पर शारीरिक प्रताड़ना के आरोप लगाए, तब सीनेट, सिंडिकेट कहां थी? गूगल पर जब मेरे नाम की सर्च की जाती है कि रिजल्ट में मेरे नाम के साथ ‘आरोपी वीसी’ लिखा आता है। इस केस के बाद पुलिस ने घेरा डाल लिया, चांसलर दफ्तर तक मसला चला गया, तब उनके साथ कौन था?
पिछली सरकारों ने पीयू को पैसे नहीं दिए, मौजूदा सरकार ने भी कुछ खास नहीं किया, तब पीयू की गवर्निंग बॉडी कहां थी? पीयू 100 करोड़ रुपये के नीचे आ गई, बजट के लिए अकेला लड़ता रहा, तब आप लोग कहां थे? फीस बढ़ोतरी में पीछे हट गए, ढाई लाख छात्रों का विश्वास हम खो रहे थे, तब कोई आगे नहीं आया? कभी एनएसयूआई ने पीयू पर लूट के आरोप लगाए, कभी एबीवीपी ने। चांसलर दफ्तर से कमेटियां बनी, लेकिन उनकी रिपोर्ट कहां है?
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इतना सब कहने के बाद वीसी ने सख्त शब्दों में कहा कि वे किसी भी हालत में हाईकोर्ट में दायर शपथ पत्र वापस नहीं लेंगे। इसके बाद सीनेट सदस्यों ने एकमत होकर पीयू की गवर्निंग बॉडी होने के नाते पीयू के रजिस्ट्रार से कहा कि वे हाईकोर्ट में एक शपथ पत्र दें कि वीसी तरफ से जो शपथ पत्र दिया गया है, उसे खारिज किया जाए। हालांकि इस नतीजे पर पहुंचने से पहले जबरदस्त बहस हुई और हंगामा हुआ।
शपथ पत्र देकर अगर गलती की तो सजा का मैं जिम्मेदार
Punjab University VC Arun
सीनेट में वीसी के हाईकोर्ट में दिए एफिडेविट पर चर्चा शुरू करने से पहले पूर्व वीसी प्रो. आरपी बांभा ने कहा कि पीयू का माहौल खराब हो रहा है। इसे ठीक करने की जरूरत है। सीनेट में समय कम है, इसलिए पूरे एजेंडे पर चर्चा कर लेनी चाहिए। इसी बीच कई सीनेटर ने विरोध जताते हुए कि वीसी प्रो. अरुण ग्रोवर ने उन पर जो डाकू और लुटेरे होने का आरोप लगाया है, उस पर जवाब दें। कई सीनेट सदस्यों ने कहा कि वीसी को हाईकोर्ट में दायर अपना शपथ पत्र वापस लेना चाहिए।
सिंडिकेट में भी सभी ने उनसे हाथ जोड़कर शपथ पत्र वापस लेने की गुजारिश की, लेकिन जब कोई हल नहीं निकला तो मजबूरन सिंडिकेट को अपनी शक्तियां वीसी से वापस लेनी पड़ी थी। हर तरफ से जब शपथ पत्र वापस लेने की बात उठी तो वीसी ने कहा कि वे ऐसा कुछ नहीं करेंगे। शपथ पत्र देकर कुछ गलती की है तो उसके लिए वे खुद जिम्मेदार होंगे। उन्हें जो सजा देनी है, दे दी जाए। उन्हें कोई मलाल नहीं होगा।
शपथ पत्र वापस लेने पर जब बहस चली तो पूर्व सांसद और सीनेट सदस्य सत्यपाल जैन ने कहा कि वीसी ने शपथ पत्र दिया है। हाईकोर्ट में शपथ देना कोई मॉल रोड पर घूमने जैसा नहीं है कि कभी भी आओ, कभी भी जाओ। शपथ पत्र ऐसे वापस नहीं लिया सकता, इसकी एक कानूनी प्रक्रिया होती है। सीनेट के कई सदस्यों ने जैन के इस पक्ष का विरोध किया। वहीं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन ने कहा कि पीयू की इज्जत बचाने का जितना जिम्मा सिंडिकेट और सीनेट का है, उससे ज्यादा वीसी का है।
अगर वीसी को अपनी निजी सोच के मुताबिक शपथ पत्र देना था तो पुराने जितने वीसी यहां से गए, उनसे बैठक कर सलाह नहीं लेनी चाहिए थी? टंडन ने कहा कि वीसी पीयू की सरंचना को खराब करने का काम कर रहे हैं। इस बहस के बीच जब एक सुझाव आया कि कुछ सदस्यों की एक कमेटी बने जो वीसी की तरफ से दिए गए शपथ पत्र को निष्काषित कराने के लिए सुझाव दे। जब पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बंसल को इस कमेटी की जिम्मेदारी देने की बात कही गई, तो बंसल ने इससे इंकार कर दिया।
हालांकि उन्होंने इस बहस के दौरान कहा कि वीसी के शपथ पत्र से उन्हें काफी दुख हुआ है। वीसी अपने अहंकार को छोड़कर शपथ पत्र वापस लें।
सीनेट में जब वीसी ने उन पर लगे शारीरिक प्रताड़ना के आरोप पर बोलना शुरू किया तो महिला सीनेटर भावुक हो गईं। कुछ देर के लिए उन्होंने बैठक छोड़ दी और सीनेट हॉल से बाहर चली गईं। बाद में वे वापस आईं और बैठक में विभिन्न मुद्दों पर अपना पक्ष रखा।
क्या है एफिडेविट, क्यों हो रहा है हंगामा
दरअसल वीसी प्रो. ग्रोवर ने हाईकोर्ट में एक शपथ पत्र दिया है कि पीयू में गवर्निंग काउंसिल में बदलाव लाने की जरूरत है। यानी सीनेट और सिंडिकेट चुने जाने की प्रक्रिया बदली जानी चाहिए। ऐसे व्यक्ति चुनकर आते हैं, जिनका पीयू से कोई संबंध नहीं है। वीसी ने शपथ पत्र में कहा है कि गवर्निंग बॉडी काम में बाधा डालती है।
यह शपथ पत्र वीसी ने हाईकोर्ट की तरफ से पीयू के लिए स्वत: संज्ञान केस में दायर किया था। सिंडिकेट और सीनेट चाहती है कि वीसी इस शपथ पत्र को वापस लें जबकि वीसी इस बात को नहीं मान रहे। सिंडिकेट, सीनेट का कहना है कि बदलाव लाने के लिए जो कमेटी बनी हुई है, पहले उसकी रिपोर्ट आए। उसके बाद उस पर चर्चा करने के बाद कोई फैसला लिया जाए।
सब्जी मार्केट जैसा लगता है माहौल: सीनेटर
सीनेट के दौरान एक महिला सदस्य ने कहा कि वे इस बॉडी का हिस्सा बनी थीं यह सोचकर की शैक्षणिक विकास पर काम होता है, लेकिन यहां तो माहौल सब्जी मार्केट जैसा है। कोई भी कुछ भी कर रहा है। वहीं सदस्य दीपक कौशिक ने कहा कि वीसी की शक्तियां कम होने से काम प्रभावित हो रहा है।
उन्हें शक्तियां दे देनी चाहिए। सीनेट सदस्य एचके दुआ ने कहा कि अगर वीसी शपथ पत्र में लिखी बातों पर कायम रहेंगे तो उन्हें शपथ पत्र वापस नहीं लेना चाहिए। वहीं सदस्य शैली वालिया ने कहा कि वीसी बदलाव लाना चाहते हैं, लेकिन इस तरह बदलाव नहीं आता। एक कक्षा का पाठ्यक्रम बदलने में भी दो साल लग जाते हैं।