चंडीगढ़। पंजाब के 196 कॉलेजों के अलावा पीयू व पंजाब के विश्वविद्यालयों के शिक्षक सातवें वेतनमान के लिए एक माह से भूख हड़ताल शृंखला चला रहे हैं, लेकिन अफसरशाही हाथ पर हाथ धरकर बैठी हुई है। अधिकारी नहीं चाहते हैं कि शिक्षकों का भला हो। पंजाब कैबिनेट ने इसका हल निकालने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए थे, लेकिन इस तरफ ध्यान नहीं दिया गया। पंजाब सीएम चरणजीत सिंह चन्नी, उच्च शिक्षा मंत्री से इस मामले में दखल देकर मामले का हल करवाएं। यह बात सोमवार को पंजाब फेडरेशन ऑफ यूनिवर्सिटी एंड कॉलेज टीचर्स ऑर्गनाइजेशन (पीफुक्टो) के अध्यक्ष डॉ. एचएस किंगरा व महासचिव डॉ. जगवंत सिंह ने कही।
पीफुक्टो के पदाधिकारी प्रेस क्लब में प्रेसवार्ता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा सचिव कृष्ण कुमार नए आए हैं। उनसे सभी शिक्षकों को उम्मीद है कि वे मसले का हल करेंगे। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि मांगों की अनदेखी की गई तो शिक्षक मजबूरी में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। उन्होंने यह भी कहा कि कॉलेजों में रखे जाने वाले असिस्टेंट प्रोफेसरों को यूजीसी पे स्केल दिया जाए। शिक्षक कर्मचारी संबद्ध कॉलेज सेवा सुरक्षा अधिनियम-1974 में भी संशोधन की मांग की। इस मौके पर पुटा के अध्यक्ष डॉ. मृत्युंजय कुमार, डॉ. बीएस तोहरा, डॉ. विनी सोफट, डॉ. निशान सिंह देओल, डॉ. मधु शर्मा आदि उपस्थित रहीं।
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पीयू वीसी को मिल रहा है सातवां वेतनमान, उन्हें दूसरे शिक्षकों की चिंता नहीं : पीफुक्टो
पीयू वीसी की ओर से कैंपस में धरना-प्रदर्शन न करने के सवाल पर पीफुक्टो के महासचिव डॉ. जगवंत ने कहा कि पीयू वीसी को अकेले सातवां वेतनमान मिल रहा है, इसलिए उन्हें दूसरे शिक्षकों की चिंता नहीं है। पंजाब, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश के शिक्षकों को सातवां वेतनमान अभी तक नहीं मिल पाया। पीयू वीसी को पता ही नहीं कि यूजीसी ने यह प्रस्ताव पहले ही पास कर दिया। मसला पंजाब सरकार को हल करना है। यह भी कहा है कि यदि यूजीसी में मामला अटका है तो शिक्षकों के हितों को देखते हुए पीयू वीसी को खुद वहां जाकर पास करवाना चाहिए। यूजीसी के अध्यक्ष उनके ही खास हैं।