चंडीगढ़ की 13 साल की बच्ची ने दुनिया से जाने के बाद छह लोगों को नई जिंदगी दी है। पीजीआई में इलाज के दौरान ब्रेन डेड घोषित होने पर बच्ची के माता-पिता से अनुमति मिलने पर उसका अंगदान कराया गया। इससे पीजीआई में भर्ती पांच मरीजों को लीवर, किडनी और कार्निया देने के साथ ही मुंबई के एक मरीज को उसका हृदय प्रत्यारोपित किया गया। पीजीआई प्रशासन ने हृदय मुंबई भेजने के लिए ग्रीन कॉरिडोर का इस्तेमाल किया।
बहादुर माता-पिता का निर्णय अनुकरणीय
पीजीआई निदेशक प्रो. जगतराम ने बच्ची के माता-पिता के निर्णय की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह एक कठिन निर्णय था लेकिन बहादुर माता-पिता ने अजनबियों की जिंदगी बचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनका यह कार्य सराहनीय और अनुकरणीय है। उन्होंने बताया कि बच्ची को आठ जुलाई को 'सेरेब्रल एडीमा' के कारण जीएमएसएच- 16 में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे पीजीआई रेफर कर दिया। इलाज के दौरान उसे 18 जुलाई को ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया।
क्रॉस मैचिंग के बाद हृदय मुंबई भेजा
पीजीआई के अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक व रोटो के कार्यवाहक नोडल अधिकारी प्रो. अशोक कुमार ने बताया कि क्रॉस मैचिंग के दौरान बच्ची के हृदय से पीजीआई की प्रतिक्षा सूची में शामिल एक भी मरीज का हृदय मैच नहीं किया। इसके बाद तत्काल आसपास के अन्य अस्पतालों को इसकी सूचना दी गई। इसके बाद मुंबई रिलायंस अस्पताल के एक मरीज को उसका दिल आवंटित किया गया। ग्रीन कॉरिडोर के लिए तीव्र परिवहन सेवा सुनिश्चित कर उसे समय पर हवाई अड्डे तक पहुंचाया गया, जिसमें पीजीआई के साथ ही चंडीगढ़ व मोहाली पुलिस, सीआईएसएफ और हवाई अड्डे के कर्मचारियों का प्रयास सराहनीय रहा।