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योगी आदित्यनाथ ने दिया विवादित बयान, दयाशंकर के मुद्दे पर खुलकर बोले

Mon, 01 Aug 2016 11:32 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
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बीजेपी सांसद योगी आदित्यनाथ रोहतक में एक कार्यक्रम के दौरान - फोटो : अमर उजाला
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बीजेपी सांसद योगी आदित्यनाथ ने विवादित बयान देकर बवाल खड़ा कर दिया है। उन्होंने दयांशकर के मुद्दे पर भी खुलकर बात की। दरअसल, जम्मू-कश्मीर में फैली हिंसा को लेकर वहां की पीस पार्टी के अध्यक्ष डॉ. अयूब उन्हें आतंकवादी कह दिया था। इस मामले को लेकर यूपी में खूब बवाल हुआ।
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इसी पर पलटवार करते हुए सांसद ने शुक्रवार को रोहतक में डॉ. अयूब को गाली दे डाली। उन्होंने डॉ. आयूब की तुलना एक जानवर से करते हुए कहा कि ट्रेनिंग के दौरान कुत्तों को सबसे पहले भौंकना सिखाया जाता है। वह ऐसे ही कुत्ते हैं जो भौंकना जानते हैं और कुछ नहीं कर सकते। इसलिए ऐसे कुत्तों के भौंकने से कुछ नहीं होता है।

राजनीति में व्यक्तिगत आरोप और चरित्र हनन नहीं होने चाहिए

योगी आदित्यनाथ
उत्तर प्रदेश के भाजपा नेता दयाशंकर सिंह के बसपा अध्यक्ष मायावती पर टिप्पणी के बाद जिस तरह से चरित्र हनन की जंग छिड़ी है, उसे बीजेपी के गोरखपुर से सांसद योगी आदित्यनाथ सही नहीं मानते हैं। वह कहते हैं कि राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप जरूर चलते हैं, लेकिन किसी पर व्यक्तिगत आरोप और चरित्र हनन नहीं होना चाहिए।

कश्मीर के हालात पर उन्होंने कहा कि कश्मीर में सेना विपरीत परिस्थितियों में काम कर रही है। इसलिए लोगों को सेना का समर्थन करना चाहिए। बुरहान के एनकाउंटर पर कहा कि वह आतंकवादी था। इस तरह के आतंकियों का समर्थन करने वाले देश के हितैषी नहीं हो सकते।
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दयाशंकर पर कार्रवाई हुई तो बसपा नेताओं पर भी होनी चाहिए

योगी आदित्यनाथ - फोटो : Getty
रोहतक में एक कार्यक्रम में शामिल होने आये सांसद योगी आदित्यनाथ ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि दयाशंकर सिंह ने मायावती पर गलत टिप्पणी की तो उसे पार्टी ने बाहर निकालकर सजा दी। दयाशंकर ने अपनी गलती पर माफी मांगी, लेकिन उसके बाद बसपा के नेताओं ने जिस तरह से उसके परिवार का चरित्र हनन किया है, वह सही नहीं है। इसके बावजूद वह लोग माफी भी मांगने को तैयार नहीं हैं।

सांसद ने उत्तर प्रदेश सरकार पर पक्षपात करने का आरोप लगाया। कहा कि दयाशंकर को किसी ने नहीं छिपाया है, लेकिन जिस तरह से उस पर मुकदमा दर्ज हुआ है, उसी तरह से बसपा के नेताओं पर मुकदमे दर्ज हैं। सभी पर कानून लागू होता है और पुलिस को केवल दयाशंकर पर कार्रवाई नहीं करनी चाहिए। अगर उस पर कार्रवाई होती है तो बसपा नेताओं की गिरफ्तारी होनी चाहिए। एक पक्षीय कार्रवाई से आक्रोश भड़क सकता है। इसके लिए पूरी तरह से वहां की सरकार जिम्मेदार होगी।
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