हुड्डा और दिग्विजय की बयानबाजी आपसी
प्रेमलता, दिग्विजय, दुष्यंत और हुड्डा के बीच चल रही राजनीतिक बयानबाजी पर कैप्टन ने कहा कि यह चलती रहती हैं। कभी कभार प्रतिस्पर्धा में भी बात होती है। बहुत कुछ देखने की जरूरत है। हुड्डा दिग्विजय की बयानबाजी से समाज को काफी कुछ पता चल रह है। इसके आंकलन की आवश्यकता नहीं है। यह उनके अपने आपस की बातचीत है।
धनखड़ बराला और मैं सब भाजपा के कार्यकर्ता
दुष्यंत को भाजपा जाट लीडर के तौर पर देखती है ऐसे में आप सुभाष बराला और ओम प्रकाश धनखड़ कहां खड़े होते हैं? इस सवाल पर कैप्टन ने कहा कि हम उस तरह के नहीं है हम कार्यकर्ता हैं। भाजपा के समर्पित और निष्ठावान कार्यकर्ता हैं। हम वर्ग विशेष नहीं समर्पित कार्यकर्ता हैं। जिसकी जो व्याख्या हो अपनी कर ले मेरी स्मृति में धनखड़ और बराला दोनों ने ऐसा क्लेम नहीं किया... हम सब भाजपा के कार्यकर्ता हैं।
कैप्टन ने कहा कि बीरेंद्र सिंह बहुत अनुभवी राजनेता हैं, वरिष्ठ हैं, भाजपा में आने से पार्टी मजबूत हुई है। अपने अनुभव का लाभ वे पार्टी को भी देते रहे हैं। हम सब उनसे बहुत कुछ सीखते हैं। कोई भी आता है तो लाभ होता है और जाता है तो नुकसान। शरीर का नाखून भी निकलता है वजन चाहें पांच ग्राम हो वजन कम तो होता है। किसी के अस्तित्व को कम या ज्यादा नहीं आंकना चाहिए। भाजपा में वे रम चुके हैं।
दादा गौतम को कैप्टन ने बताया प्रायश्चित मंत्र
पूर्व में कैप्टन के खिलाफ उनके नारनौंद के प्रतिद्धंदी दादा गौतम ने बहुत कुछ कहा। यह पूछने पर... अब दादा गौतम कहते हैं कि कैप्टन मेरे बेटे की तरह हैं... मुझसे गलती हो गई। कैप्टन ने संस्कृत में मंत्र सुनाते उसका सार बताया कि हे ईश्वर मुझसे जीवन में काम करते करते न्यूनता या अतिरेक में कोई गलतियां हो गई हैं तो उन सबके लिए मैं क्षमा प्रार्थना करता हूं और उनको दोबारा न दोहराने के लिए प्राश्चित करता हुए उसका संकल्प लेता हूं। लेकिन प्रायश्चित कभी क्षमा प्रार्थना से पूर्ण नहीं होता। प्रायश्चित क्षमा प्रार्थना के आगे है। न दोहराने का संकल्प पूरा होने से प्रायश्चित पूरा होता है।