जनादेश में भाजपा को इस बार यह जादुई आंकड़ा तो नहीं नसीब हुआ लेकिन हरियाणा में सबसे बड़े दल के रूप में उभरने के बाद भाजपा हाईकमान इस मौके को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता था। लिहजा इसकी जिम्मेदारी खुद भाजपा के चाणक्य अमित शाह ने अपने कंधों पर ली।
जनादेश के दिन ही यानी 24 अक्टूबर से ही हरियाणा भाजपा की पहली चुनौती शुरू हो चुकी थी। उसी दिन से ही भाजपा ने अपने सांसदों व अन्य नेताओं के जरिए निर्दलीय विधायकों से संपर्क साधना शुरू कर दिया था।
कुछेक विधायकों को तो उसी दिन दिल्ली भी बुलवा लिया गया था और समर्थन को लेकर बातचीत शुरू कर दी गई थी। लेकिन भाजपा के रणनीतिकारों को इस बात का आभास भली प्रकार था कि निर्दलीयों पर निगाहें विरोधियों की भी है, इसलिए सूबे में सरकार के स्थायित्व के लिए एक और ‘विकल्प’ की सख्त जरूरत थी। ताकि सरकार अपना कार्यकाल पूरा कर सके। लिहाजा भाजपा के रणनीतिकारों ने विकल्प की संभावनाओं पर काम शुरू कर दिया।
अंतत: भाजपा की ओर से जननायक जनता पार्टी (जजपा) से संपर्क साधकर उसके समर्थन की मांग की गई। उधर, चूंकि जजपा को भी जनादेश में स्पष्ट बहुमत नहीं प्राप्त हुआ था, इसलिए जजपा भी ऐसी ही संभावनाओं की तलाश में थी, जिसके बूते वे सत्ता की सीढ़ियां चढ़ सके, क्योंकि जजपा को इस विधानसभा चुनाव में सिर्फ दस सीटें ही हासिल हुई थी।
सरकार बनाने का सपना पाले कांग्रेस भी हालांकि जजपा और निर्दलीयों के संपर्क में थी। लेकिन कांग्रेस की दाल नहीं गली और भाजपा ने जजपा के सभी 10 और निर्दलीय 7 विधायकों का समर्थन पत्र हासिल कर हरियाणा में सरकार बनाने के लिए कुल 57 विधायकों के संख्या बल वाला मजबूत प्रस्ताव शनिवार को सूबे के राज्यपाल के समक्ष पेश कर दिया।
परायों के साथ अपनों को भी साधने की चुनौती
भाजपा ने अपने 40, जजपा के 10 और आजाद 7 विधायकों को संग लेकर राज्यपाल को सरकार बनाने का प्रस्ताव तो सौंप दिया है। लेकिन भाजपा के समक्ष अब अगली बड़ी चुनौती मंत्रीमंडल का गठन है। 91वें संविधान संशोधन अधिनियम 2003 के अंतर्गत केंद्र व राज्य सरकारों के लिए यह व्यवस्था की गई थी कि वे कुल सीटों का 15 प्रतिशत ही मंत्री बना सकती हैं। जबकि वे छोटे राज्य जहां कुल सीटें 40 या उससे कम हैं, तो वहां राज्यों को मुख्यमंत्री समेत 12 मंत्री बनाने की छूट दी गई है। लेकिन हरियाणा में कुल 90 सीटें हैं, उसके 15 फीसद के लिहाज से हरियाणा में 14 से ज्यादा मंत्री नहीं बनाए जा सकते। उधर, सूत्रों के अनुसार भाजपा को दस विधायकों का समर्थन देने वाली जजपा ने 2 कैबिनेट (डिप्टी सीएम समेत) और 2 राज्यमंत्री भाजपा से मांगे हैं।
सूत्रों ने बताया कि इस पर जजपा विधायक दुष्यंत चौटाला और भाजपा के आला नेताओं के बीच बातचीत हो चुकी है और भाजपा ने जजपा को सिर्फ3 (2 कैबिनेट और 1 राज्यमंत्री) ही देने का ऑफर रखा है। अब देखना यह है कि 4 मंत्री मांगने वाली जजपा भारतीय जनता पार्टी के इस ऑफर से संतुष्ट होती है या नहीं।
उधर, सात निर्दलीय प्रत्याशी भी मंत्री बनने की चाह रखते हैं, मगर सभी को मंत्रीपद देना संभव नहीं है। लेकिन फिर भी भाजपा निर्दलीयों में से एक को मंत्रीपद दे सकती है, ये किसे दिया जाएगा, यह तय करना भी भाजपा के लिए चुनौती है।
भाजपा को मंत्रीमंडल गठन में भाजपा को परायों के साथ-साथ ‘अपनों’ का भी ध्यान रखना है। फिर से जीतकर विधानसभा पहुंचे भाजपा विधायक भी चाहते हैं कि उन्हें इस जीत का इनाम मिले। वरिष्ठ विधायक तो पहले से ही लॉबिंग में जुटे हैं। इसके अलावा सूबे में भाजपा के दो बड़े गुट ऐसे भी हैं, जो अपने चहेते विधायकों को भी मंत्रीमंडल में जगह दिलवाने के लिए जीतोड़ कोशिश करेंगे।
इनमें एक हैं केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह और दूसरे हैं केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर। चुनाव में भाजपा के टिकट वितरण के दौरान भी दोनेां दिग्गज नेताओं की खूब चली थी, उन्होंने अपने पंसदीदा नेताओं को टिकट दिलवाई, जिनमें से अधिकतर जीतें भी है। अब ये दोनों दिग्गज नेता भी चाहेंगे कि उनके चहेतों के मंत्रीमंडल में जगह मिले। भाजपा सूत्र बताते हैं कि इसके लिए इन दोनों नेताओं ने प्रयास भी शुरू कर दिए हैं।
सरकार जो भी रहे, अमूमन सोच व कोशिश यह रहती है कि टिकट वितरण से लेकर जीतने के बाद मंत्रिमंडल के गठन तक की प्रक्रिया में कोई भी समुदाय खुद को उपेक्षित महसूस न करे और जहां तक संभव हो सके सत्ता में विभिन्न जातियों को भी प्रतिनिधित्व मिले। लिहाजा सरकारें इस प्रक्रिया में जातीय समीकरणों को जरूर साधकर चलती है।
हरियाणा जैसे सूबे में जहां एक बार फिर विधानसभा चुनाव में जनादेश ने बता दिया है कि प्रदेश की सियासत में जातियों का पूरा हस्तक्षेप रहता है, इसलिए अब मंत्रिमंडल गठन के दौरान भी जातीय समीकरणों को साधकर ही भाजपा को चलना होगा। लिहाजा भाजपा को मंत्रिमंडल में परिस्थितियों के अनुसार महिला समेत विभिन्न वर्गों से संबंद्ध विधायकों का ध्यान रखना होगा।
दावा, बिना बाधा अपना कार्यकाल पूरा करेगी सरकार
हरियाणा में भाजपा सरकार अपना पूरा कार्यकाल मजबूती से संपन्न करेगी। हरियाणा के विकास के लिए भाजपा सदैव प्रतिबद्ध है। सरकार के संचालन में किसी प्रकार की कोई बाधा नहीं आएगी। - रविशंकर प्रसाद, केंद्रीय मंत्री, भारत सरकार
हम हरियाणा को साफ सुधरी सरकार देने जा रहे हैं। सीएम मनोहर लाल ने नई सरकार के लिए अपना दावा भी प्रस्तुत कर दिया है। सरकार पूरी मजबूती से काम करेगी। - डा. अनिल जैन, हरियाणा भाजपा प्रभारी
पूरे पांच साल सभी मिलकर नई सरकार को अपने लक्ष्य तक पहुंचाएंगे। जनता की सेवा ही हमारी सरकार का लक्ष्य है। सरकार पूरी तरह स्थायित्व व मजबूती के साथ काम करेगी। - मनोहर लाल, सीएम
जजपा ने अपना समर्थन भारतीय जनता पार्टी को दिया हैं। हमारा संकल्प है जन सेवा, इसी सोच के साथ ही हमने भाजपा को समर्थन दिया है, ताकि सरकार का हिस्सा बनने के बाद हम जन सेवा को और प्रभावशाली ढंग से कर सकें। - दुष्यंत चौटाला, जजपा विधायक
एक स्थायी सरकार देने के लिए प्रदेश हित में लिए गए दुष्यंत चौटाला के इस सकारात्मक फैसले का समर्थन और स्वागत करती हूं। मुझे पूरी उम्मीद है अब एक मजबूत सरकार के साथ हमारा हरियाणा निरंतर, निर्बाध, प्रगति की ओर अपनी यात्रा को जारी रखेगा। - बबीता फोगाट, पहलवान, भाजपा नेत्री