हजारों करोड़ के बिटक्वाइन घोटाले में चंडीगढ़ पुलिस ने बड़ी सफलता मिलने का दावा किया है। मास्टरमाइंड के दो एजेंट गिरफ्तार किए गए हैं। साइबर सेल ने मामले में मुख्य आरोपी और मास्टरमाइंड अमित भारद्वाज के दो खास एजेंट को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान दिल्ली चाणक्यपुरी निवासी संचित और मूलरूप से राजस्थान के हनुमानगढ़ निवासी और वर्तमान में दिल्ली में रहने वाले राजेश कुमार उर्फ राजू के तौर पर हुई है। ये दोनों अमित भारद्वाज के लिए पैसा जमा कर उसकी कंपनियों में ट्रांसफर करते थे।
फिलहाल, पुलिस ने दोनों को अदालत में पेश कर उनका तीन दिन का रिमांड हासिल किया है। सूत्रों के अनुसार, बिटक्वाइन से संबंधित शिकायत के बाद जांच में सामने आया था कि एक शिकायतकर्ता ने बिटक्वाइन में निवेश के लिए जिस बैंक खाते में 30 लाख रुपये ट्रांसफर किए थे, वह दिल्ली स्थित गोल्ड ओवरसीज कंपनी के नाम पर दर्ज था। यह कंपनी राजेश कुमार उर्फ राजू चला रहा था। इस कंपनी से पैसा डीएम ट्रेड इम्पेक्स प्राइवेट लिमिटेड में ट्रांसफर किया गया। इसे भी राजू ही चला रहा था। इन दोनों कंपनियों से पैसा स्विच इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड में ट्रांसफर किया गया था।
इसका डायरेक्टर संचित है। चंडीगढ़ में रिटायर्ड कर्नल और मोहाली निवासी बिजनेसमैन और रियल इस्टेट से जुड़े कारोबारियों से बिटक्वाइन में निवेश के नाम पर कुल 15 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में यूटी पुलिस मास्टमाइंड अमित भारद्वाज के दो खास एजेंट संचित और राजू को दबोचा है। खास बात यह है कि मास्टमाइंड अमित भारद्वाज समेत अन्य आरोपियों को गिरफ्तार करने वाली पुणे पुलिस अब तक इन दोनों तक नहीं पहुंच पाई थी।
साइबर सेल ने मामले की जांच की तो सामने आया कि इन दोनों की कंपनियों से बड़ी मात्रा में पैसा अमित भारद्वाज की कंपनियों में से एक नेक्सजेन फेसिलिटी में ट्रांसफर किए गए थे। राजू और संचित दोनों अमित के लिए पैसा जमा करने का काम करते हैं। ये लोग उसके लिए पैसे की कलेक्शन कर उसे ट्रांसफर करते और उसके पूरे पैसे का हिसाब-किताब रखते थे। साइबर सेल ने दोनों की भूमिका सामने आने के बाद उन्हें दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया। शुक्रवार को पुलिस ने दोनों को आगे की जांच और पैसे की रिकवरी के लिए उन्हें दिल्ली ले जाने के लिए उनका अदालत से तीन दिन का रिमांड हासिल किया है।
दिल्ली से दुबई, सिंगापुर, थाईलैंड, मलेशिया भेजा जा रहा था पैसा
पैसा निवेश करने वाले लोगों को एजेंट अमित से मिलवाते थे। इसके बाद वह उन्हें पैसे जमा करवाने के लिए बैंक खाते बताते थे। यह बैंक खाते संचित और राजू की शेल कंपनियों के नाम पर चल रहे थे। इनकी कंपनियों से पैसे कई शेल कंपनियों में ट्रांसफर होते हुए अमित की तीनों कंपनियों में ट्रांसफर होते थे। इसके अलावा ये दोनों दुबई, मलेशिया, थाईलैंड और सिंगापुर में भी पैसा भेजवाते थे। इसी पैसे से बाद में बिटक्वाइन खरीदे जाते थे और अमित ही उन्हें आगे माइनिंग में निवेश कर निवेश करने वालों से हर महीने एक तय लाभ देने की बात कहते हुए 18 महीने का करार करता था।
अमित भारद्वाज को प्रोडक्शन वारंट पर लाएगी पुलिस
साइबर सेल की टीम ने संचित और राजू की गिरफ्तार के साथ ही घोटाले के मास्टरमाइंड अमित भारद्वाज को पुणे जेल से प्रोडक्शन वारंट पर लाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस ने अदालत में उसके प्रोडक्शन वारंट के लिए याचिका दायर कर दी है।
अमित के भाई विवेक का पड़ोसी है संचित
संचित मास्टमाइंड अमित भारद्वाज के भाई विवेक भारद्वाज के दिल्ली स्थित घर के पास रहता है। विवेक ने ही उसे इस घोटाले में शामिल किया था। इसके बाद वह अमित के लिए काम करने लगा। विवेक ने ही संचित को दुबई में अमित से मिलवाया था। इसके बाद से वह कई बार दुबई उससे मिलने भी गया।
शिकायतकर्ताओं ने पैसे एक बैंक खाते में ट्रांसफर किए थे। ये बैंक खाते दिल्ली स्थित कंपनियों के थे। केवल कागजों में चलने वाली इन कंपनियों को राजू और संचित संचालित कर रहे थे। जांच में सामने आया है कि ये लोग आगे बिटक्वाइन मास्टरमाइंड अमित भारद्वाज की कंपनियों में पैसे ट्रांसफकर करते थे। बैंक खातों की डिटेल में दोनों के खिलाफ काफी सबूत मिले हैं। इस आधार पर ही दोनों की गिरफ्तारी की गई है। फिलहाल अभी दोनों से विस्तार से पूछताछ करनी बाकी है।
- रश्मि शर्मा यादव, डीएसपी, साइबर सेल
यह है मामला
चंडीगढ़ पुलिस को दी शिकायत में सेना से रिटायर्ड कर्नल ने कहा था कि वर्ष 2016 में उनकी मुलाकात अमित और अजय भारद्वाज समेत अन्य से विशाल कादियान ने दुबई में करवाई थी। उन्होंने शिकायतकर्ता को बिटक्वाइन में पैसा लगाकर कुछ ही समय में बहुत बड़ा मुनाफा कराने का लालच दिया था। उन्होंने बिट क्वाइन खरीद इसे माइनिंग के क्षेत्र में लगाने की बात कही थी। इसके बाद रिटायर्ड कर्नल ने अमित और अजय के खातों में डेढ़ से दो करोड़ रुपये ट्रांसफर किए थे। इससे अमित ने उनके लिए बिटक्वाइन खरीदे थे और इन्हें माइनिंग में लगाने की बात कही थी।
लेकिन, जब मार्च में पुणे पुलिस ने अमित और अजय को बिट्क्वाइन से जुड़े 30 हजार करोड़ रुपये के घोटाले में गिरफ्तार किया तो रिटायर्ड कर्नल को भी खुद के ठगे जाने का अहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने ऑनलाइन अपने बिटक्वाइन की जानकारी ली तो उनके ऑनलाइन खाते में एक भी बिटक्वाइन नहीं था। इसके बाद उन्होंने चंडीगढ़ पुलिस को शिकायत दी। साइबर सेल के पास अब तक बिटक्वाइन से जुड़ी करीब 10 शिकायतें सामने आ चुकी हैं। इनसे कुल 15 करोड़ रुपये की ठगी सामने आई है।