रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत और फ्रांस लंबे समय से आर्थिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक साझेदार रहे हैं। मजबूत लोकतंत्र के प्रति हमारी आस्था और संपूर्ण विश्व में शांति की कामना, हमारे आपसी संबंधों के आधार हैं। वर्तमान दौर में, दुनिया में सुरक्षा के साथ-साथ, आर्थिक और भू-राजनीतिक मुद्दे नए-नए रूपों में हमारे सामने आ रहे हैं। इनका लगातार सामना करते हुए, हम दो बड़े लोकतंत्र, एक स्थायी, सक्रिय, और भविष्योन्मुखी संबंध बनाने और बढ़ाने में कामयाब रहे हैं। हमने न सिर्फ एक दूसरे की जरूरतों और चुनौतियों को गहराई से समझा है, बल्कि उनसे पार पाने की दिशा में कदम से कदम मिला कर आगे बढ़ रहे हैं।
रक्षा मंत्री के अनुसार भारत की स्वाधीनता के बाद, हमारे देश और फ्रांस के बीच जीवंत रक्षा सहयोग विकसित हुआ है। आपसी रक्षा सहयोग से हमारी एयरफोर्स ने फ्रेंच फाइटर एयरक्रॉफ्ट से अपने आपको न सिर्फ लैस किया है बल्कि अनेक मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम भी दिया है। 1965 के युद्ध में पाकिस्तान के खिलाफ हमारी विजय इस बात की गवाह है।
साथियों एक बार फिर एयरफोर्स ने 1999 में करगिल में भी यह इतिहास दोहराया था। उधर, बैठक में फ्रांस की रक्षामंत्री फ्लोरेंस पार्ले ने कहा कि उन्हें भारत की ओर से निवेश संबंधी जो न्योता मिला है, वे उसका सम्मान करती हैं। उनके अनुसार भारत और फ्रांस एक विशेष रणनीतिक साझेदार हैं। जो समय के साथ लगातार मजबूत हो रहा है। फ्रेंच सरकार इस ऑफर पर भी अपना रवैया सकारात्मक रखेगी, ऐसी उन्हें आशा है।