उन्होंने कहा कि नवदीप को बचाने में जालंधर सेंट्रल के विधायक रमन अरोड़ा का हाथ था। कुछ दिन लाइन में रखने के बाद फिर से उसे सरकार की कृपा से शहर में ही थाना प्रभारी लगा दिया गया। मजीठिया ने कहा कि एक थाना प्रभारी शहर के पॉश एरिया सूर्या इंक्लेव में दो करीब करोड़ रुपये की लागत से बनी कोठी में रहता है, उसके पास इतना पैसा आ कहां से रहा है। यह सारा पैसा नशा तस्करों की मिलीभगत से उसके पास आ रहा है। उन्होंने कहा कि नवदीप को इसलिए नहीं पकड़ा जा रहा क्योंकि नेताओं के हाथ नवदीप के साथ हैं। उसे फरार हुए 25 दिन हो गए हैं लेकिन उसकी सम्मानित किए जाने की फोटो अभी तक थाने से हटाई नहीं गई है।
विधायक रमन अरोड़ा ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उनके विधानसभा में जो पुलिस अधिकारी होंगे उनसे बात कर लोगों के कामों का फीडबैक लेना उनकी जिम्मेदारी है, जो खुद नशे के केस में जेल में रहा हो, उससे इसी तरह की बातों की अपेक्षा की जा सकती है।
वहीं, एसीपी जालंधर सेंट्रल निर्मल सिंह ने विक्रम मजीठिया के आरोपों पर कुछ भी कहने से इन्कार कर दिया। एसीपी ने कहा कि वह अपनी ड्यूटी ईमानदारी से निभाते आ रहे हैं और आगे भी निभाएंगे।