एनडीपीएस मामले में फंसे पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया को फिलहाल जल्द राहत के आसार दिखाई नहीं दे रहे हैं। नियमित जमानत की मांग को लेकर मजीठिया की ओर से दाखिल याचिका से जस्टिस एजी मसीह ने खुद को अलग करते हुए इसे अन्य बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश के पास भेज दिया है।
मजीठिया की याचिका पर जस्टिस एजी मसीह एवं जस्टिस संदीप मौदगिल की खंडपीठ सुनवाई कर रही थी। 31 मई को खंडपीठ ने इस याचिका पर सभी पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित भी रख लिया था लेकिन एक महीना चार दिन के बाद अब जस्टिस मसीह ने खुद को इस याचिका से अलग कर लिया है।
उन्होंने इस याचिका को अन्य बेंच के समक्ष भेजने का आदेश दिया है, जिसमें वह सदस्य न हों। मजीठिया को इस मामले में नियमित जमानत दी जाए या नहीं। अब इस पर हाईकोर्ट की अन्य बेंच फिर से सुनवाई करेगी। ऐसे में याचिका लंबित रहते तक मजीठिया हिरासत में ही रहेंगे।
इससे पहले मजीठिया ने सुप्रीम कोर्ट में अपने खिलाफ दर्ज इस एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया था लेकिन मजीठिया को निर्देश दिए थे कि वह अपनी इस मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर करें और हाईकोर्ट की खंडपीठ इस पर अपना फैसला सुना सकती है। इसके बाद मजीठिया ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस मामले में जमानत दिए जाने की मांग कर दी थी।
मजीठिया के खिलाफ पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में यह एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव लड़ने तक मजीठिया की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए उन्हें राहत दे दी थी। मतदान के बाद 24 फरवरी को मजीठिया ने मोहाली कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। इसके बाद उन्हें पटियाला जेल भेज दिया गया। 10 मार्च को चुनाव परिणाम आया तो मजीठिया अमृतसर ईस्ट से चुनाव हार गए थे, तब से वह न्यायिक हिरासत में हैं।