प्रो. सोबती का यह अभियान अभी जारी है। कैंपस में अपने खर्च से वह एक और पार्क का निर्माण करने जा रहे हैं। 65 साल की उम्र में उनका जोश कम नहीं हुआ। यही नहीं वह हिंदी में पर्यावरण से जुड़ी पुस्तकें भी लिख रहे हैं। उनके कामों को देखते हुए ही वह दो से तीन विश्वविद्यालयों में कुलपति रहे।
कई अन्य बड़े पदों पर आसीन रहे। उन्होंन बताया कि बायोटेक्नोलॉजी विभाग के बाहर वह मिनी रोज गार्डन बना रहे हैं। जल्द इसका काम पूरा होगा। उन्होंने सीख देते हुए कहा कि जिस मिट्टी से बने हैं, उस मिट्टी के बनना सीखो। बोलने से नहीं, काम करने से हरियाली बढ़ेगी।
प्रो. एएस अहलूवालिया: हरियाली पर किए कई शोध
पीयू के पूर्व एसवीसी एवं इंटरनल यूनिवर्सिटी बारू साहिब हिमाचल प्रदेश के प्रो. वीसी प्रोफेसर एएस अहलूवालिया का नाम भी पर्यावरण प्रेमियों में गिना जाता है। उन्होंने शहर की हरियाली पर शोध किया। पेड़ों पर रोग लगने के कारणों से लेकर उनके इलाज पर काम किया। पीयू कैंपस में वह हर दिन सुबह उठकर पेड़ों का हाल जानने जाते हें। हरियाली को जहां नुकसान होता, उस पर अपनी बात भी रखते रहे है।