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चंडीगढ़ जीएमएसएच की नर्सिंग सुपरिंटेंडेंट बोलीं- स्टाफ पर नाज, उन्हीं की बदौलत हो रहे कामयाब

Sat, 11 Apr 2020 03:15 PM IST
खुशबू गोयल वीणा तिवारी, चंडीगढ़
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कमांडो की तरह कोरोना से लड़ रहीं नर्सें - फोटो : अमर उजाला
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कोई भी जंग एक व्यक्ति अकेले के दम पर नहीं जीत सकता। जंग में बड़े सिपहसालार से लेकर एक छोटे सिपाही तक की भूमिका अहम होती है। अगर सेना में वीर जवान शामिल हों तो कोई भी दुश्मन ज्यादा देर तक नहीं टिक सकता। कोरोना से इसी जंग में हमारे नर्सिंग और अन्य पैरा मेडिकल स्टाफ ने हर कदम पर आगे बढ़कर मोर्चा लिया है। आज उनकी ही बदौलत इस संकट की घड़ी भी हम कमजोर नहीं पड़े हैं।
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ये कहना है सेक्टर-16 स्थित जीएमएसएच की नर्सिंग सुपरिंटेंडेंट परमिंदरजीत थिंड का। जिनका स्टाफ उनके साथ हर कदम पर खड़ा है। परमिंदरजीत ने बताया कि कोरोना वार्ड और आइसोलेशन वार्ड में उनकी महिला स्टाफ नर्स लगातार 12 घंटे की ड्यूटी कर रही हैं। उनमें हरिंदर कौर, जसबीर कौर और रेखा शामिल हैं। उनके साथ वार्ड ब्वॉय शीशपाल, लखबीर व अरुण भी बखूबी अपना फर्ज अदा कर रहे हैं।

वही हरजिंदर, जसबीर और रेखा का कहना है कि सीमा पर सेना के जवान 12 महीने हमारी सुरक्षा में तैनात रहते हैं तो क्या इस संकट की घड़ी में हमें आगे आकर अपनी ड्यूटी पूरी नहीं करनी चाहिए। आज देश को हमारी भी जरूरत आन पड़ी है और इस संकट की घड़ी में हम तैयार हैं। अगर अपना फर्ज निभाते हुए हमें कुछ हो भी जाता है तो हमारा नाम भी उन शहीदों की तरह याद किया जाएगा, जो सीमा पर दुश्मनों से लड़ते हुए शहीद हो जाते हैं।
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शीशपाल, लखबीर और अरुण भी अपनी ड्यूटी को देकर बहुत गंभीर हैं। इनका कहना है कि एक नागरिक होने के नाते परिवार से पहले देश के प्रति अपना फर्ज अदा करना होगा और इसके लिए इस संकट की घड़ी से बड़ा कोई और कठिन पल फिलहाल हो नहीं सकता। इसलिए जी जान से लगे हैं कोरोना को हराने में।
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इनके लिए फर्ज सबसे पहले, जान जोखिम में डालकर कर रहे ड्यूटी

कोरोना के डर से जब हम सब घरों में बंद हैं तब एंबुलेंस का स्टाफ डर को दरकिनार कर अपना फर्ज अदा कर रहा है। दिन हो या रात यह लोग बेखौफ होकर मरीजों को उनके गंतव्य तक पहुंचा रहे हैं। ऐसे ही एक एंबुलेंस चालक हैं संजय प्रजापति। सेक्टर-16 स्थित जीएमएसएच में 112 एंबुलेंस स्टाफ के रूप में तैनात संजय मौलीजागरां डिस्पेंसरी की लोकेशन देखते हैं।

उस लोकेशन के अंतर्गत जहां से भी कॉल आती हैं, संजय वहां चंद मिनटों में एंबुलेंस लेकर पहुंच जाते हैं। इतना ही नहीं इनकी एंबुलेंस में कोरोना के संदिग्ध और कोरोना पॉजिटिव मरीजों को भी एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाया जा रहा है। संजय का कहना है कि इस संकट की घड़ी में हमें आगे बढ़कर अपनी ड्यूटी करनी चाहिए।  अस्पताल प्रशासन के निर्देशानुसार मैं अपनी ड्यूटी पूरी करते हुए अपनी सुरक्षा का भी पूरा ख्याल रखता हूं।

ड्यूटी के दौरान मास्क, प्रोटेक्शन किट और अन्य जरूरी मानकों को पूरा करके ही मैं एंबुलेंस में बैठता हूं। ड्यूटी के बाद घर जाकर भी पहले खुद को सैनिटाइज करता हूं, उसके बाद परिवार के संपर्क में आता हूं।
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