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मुश्किलों से जूझ रहा मुर्गीपालन उद्योग, जाने क्या होगा आगे?

Fri, 27 Nov 2015 12:56 PM IST
अरविंद बाजपेयी/अमर उजाला, बरवाला।
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कभी सफलता की कहानी लिखने वाला मुर्गी पालन का फंडा अब ठंडा हो गया है। पंचकूला जिले के पोल्ट्री फार्म ओनर्स बमुश्किल गुजर-बसर कर रहे हैं। मुर्गी पालन के क्षेत्र में उतरी बड़ी-बड़ी कंपनियां और मुर्गी पालन में लगने वाली महंगी फीड से फार्म हाउस के मालिकों के हाथ पैर फूल चुके हैं।
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न तो पंचकूला के पोल्ट्री फार्म के लिए कोई इंफ्रास्ट्रक्चर है न ही अन्य व्यवस्थाएं। हो यह रहा है कि दूसरे राज्यों में टैक्स और फीड आदि की रियायत के कारण यहां के उद्यमी उनके कंपटीशन में टिक तक नहीं रहे।

तीन सौ रुपये में चिक से मुर्गी
बरवाला में करीब 150 पोल्ट्री फार्म हैं। एक फार्म हाउस के मालिक ने बताया कि चिक से लेकर लेयर बर्ड बनने तक की कीमत करीब तीन सौ रुपये होती है। एक चिक से मुर्गी बनने तक 110 से 125 दिन लगते हैं। इसके बाद उनसे प्रोडक्शन शुरू होता है। पहले यही कीमत पचास से सौ रुपये के बीच होती थी। इसके साथ ही मुर्गी पालन व्यवसाय में गर्मी और सर्दी दोनों ही मौसम में केंद्रों पर स्पेशल इंतजाम करना पड़ता है। जिसकी लागत भी काफी ज्यादा आती है।
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कच्ची और संकरी रोड
बरवाला के गांव कामी अलीपुर में बनाए गए इन फार्म हाउस को अप्रोच करने के लिए कोई पक्की सड़क नहीं है। यहां गाड़ियां बामुश्किल गुजर पाती हैं, सिंगल रोड पर जाने वाले वाहन को रात के समय यहां से निकल तक नहीं सकते हैं, लेकिन पोल्ट्री उद्योग से जुड़े उद्यमी पिछले कई साल से इन रोड्स के सहारे ही अपना कामकाज चला रहे हैं।

सस्ता करो मक्की और बाजरा
बरवाला के पोल्ट्री ओनर्स का कहना है कि मक्की और बाजरा के रेट्स में लगातार इजाफा हो रहा है। बाजरा 1400 रुपये क्विंटल और मक्की 1650 रुपये क्विंटल आ रही है। इस कारण प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ गई है जबकि मुनाफा दूसरे राज्यों की तुलना में कम हो चुका है। उद्यमियों का कहना है कि मक्की और बाजरा सस्ता करना चाहिए।

पोल्ट्री फार्म-एक नजर
कुल पोल्ट्री फार्म-150
टर्नओवर-चार हजार करोड़ रुपये
पंचकूला में रेवेन्यू-तीन करोड़ रुपये

बरवाला की पोल्ट्री इंडस्ट्री तीन साल से परेशानियों से जूझ रही है। इस स्माल स्केल इंडस्ट्री के लिए कोई स्पेशल पैकेज तो दिया नहीं गया, अब मक्की और बाजरा के रेट्स भी ज्यादा हो गए हैं। इसके साथ ही कई ऐसे ग्रुप बन चुके हैं जो कि रेट होल्डिंग में लगे हैं। हमारी अपील है कि इसकोे जल्द बंद किया जाए, जिससे उद्योग की परेशानी खत्म हों।
दर्शन सिंगला, अध्यक्ष, हरियाणा पोल्ट्री एसोसिएशन

बरवाला का पोल्ट्री उद्योग इस समय संकट में है। इसका प्रमुख कारण महंगाई है। एक ओर प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ गई है और दूसरी ओर कंपटीशन, जिससे मुनाफा लगभग गायब हो गया है। इस उद्योग के लिए स्पेशल इंसेंटिव या स्पेशल पैकेज दिया जाना चाहिए।
सुमित गुप्ता, जय अंबे पोल्ट्री फार्म

बरवाला की पोल्ट्री इंडस्ट्री में अब मंदी छा चुकी है। इस इंडस्ट्री के लिए महंगाई एक बड़ी समस्या बन चुकी है। सरकार को इसके लिए स्पेशल पैकेज देना चाहिए, जिससे हम कंपटीशन की दौड़ में आ सकें।
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विनय गर्ग, क्लासिक पोल्ट्री फार्म
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