हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष कुमारी सैलजा ने क्रीमीलेयर के नए प्रावधानों पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि पिछड़े लोगों को आरक्षण से वंचित रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। क्रीमीलेयर को लेकर जारी नई अधिसूचना सुप्रीम कोर्ट को भ्रमित करने वाली है। यह सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द अधिसूचना की ही कॉपी है। सभी स्रोतों से वार्षिक आय छह लाख रुपये निर्धारित करने से चपरासी, डी श्रेणी के सैनिकों, किसानों और कौशल श्रमिकों के बच्चों के आरक्षण का अधिकार छिन गया है।
यह कानून के खिलाफ होने के साथ ही इंद्रा साहनी मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के दिशा-निर्देश पर निर्धारित मानदंडों से भी अलग है। सामाजिक रूप से पिछड़े कर्मचारियों के वेतन और किसान की कृषि आय को वार्षिक आय में शामिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार वर्ष 1995 से 2016 तक केंद्र सरकार के क्रीमीलेयर मानदंड का पालन कर रही थी।
मौजूदा सरकार ने वर्ष 2016 में पिछड़े वर्गों को विभाजित करने और उनको आरक्षण के लाभ से वंचित करने के लिए नए मानदंड लागू कर दिए। यह पिछड़ा वर्ग के हकों को छीनने का प्रयास है। इसे सहन नहीं किया जा सकता। उनकी मांग है कि इंद्रा साहनी मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और केंद्र के निर्धारित मानदंडों के अनुसार ही हरियाणा के पिछड़े वर्गों को आरक्षण का लाभ दिया जाए। उन्हें वंचित किए जाने पर कांग्रेस आंदोलन छेड़ने से भी गुरेज नहीं करेगी।