नौकरी नियमित करने की मांग के लिए बस स्टैंड पर जाम लगाए बैठे ईजीएस अध्यापक यूनियन का एक वालंटियर वीरवार को पोल पर चढ़ गया, इसके बाद उसने खुद पर पेट्रोल छिड़क कर आग लगाने का प्रयास किया।
काफी मशक्कत के बाद साथी अध्यापकों ने उसे ऐसा करने से रोक लिया। यूनियन नेता परमजीत कौर ने बताया कि अध्यापक राजविंदर सिंह निवासी गुरुहरसहाय भी शुरू से अध्यापक यूनियन के साथ प्रदर्शन कर रहे हैं।
वह दिल के मरीज हैं। अब तक ये आठवें अध्यापक हैं, जिन्होंने नौकरी रेगुलर की मांग के लिए खुद पर पेट्रोल छिड़क आग लगाने का प्रयास किया। इससे पहले 4 दिसंबर को गोल डिगी के पास ईजीएस अध्यापक निशांत कपूरथला ने पेट्रोल छिड़क आग लगाने का प्रयास किया।
5 दिसंबर को इसी जगह पर अध्यापक गगन अबोहर ने सल्फास निगल आत्महत्या का प्रयास किया था। इसके बाद 19 दिसंबर को भी चार ईजीएस अध्यापकों ने जहर निगल खुदकुशी का प्रयास किया और अब 20 दिसंबर को अध्यापक समरजीत सिंह मानसा ने जल रहे पुतले की आग में कूदकर खुदकुशी का प्रयास किया।
ईजीएस/एसटीआर अध्यापकों ने बस स्टैंड चौक पर लगाया जाम
ईजीएस/एसटीआर अध्यापकों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। इसके तहत अध्यापकों ने वीरवार को बठिंडा के बस स्टैंड चौक पर धरना लगा दिया।
‘दस सालों से अध्यापक कर रहे रेगुलर करने की मांग’
जान देने की कोशिश
- फोटो : अमर उजाला
अध्यापक यूनियन के नेता दर्शन सिंह ने बताया कि वह सरकार से नौकरी पर रेगुलर करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी मांग को अनदेखा कर रही है। इस वजह से अब अध्यापक सरकार के साथ आरपार की लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि इसके लिए अध्यापक हर कुर्बानी देने के लिए तैयार हैं। खबर लिखे जाने तक जाम जारी था।
अध्यापक समरजीत की हालत गंभीर, पीजीआई रेफर
अध्यापक यूनियन के नेता दर्शन सिंह ने बताया कि बुधवार को जल रहे पुतले की आग में कूदकर झुलसे अध्यापक समरजीत सिंह की हालत गंभीर बनी हुई है। उन्हें बीती बुधवार रात को फरीदकोट से पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि समरजीत की गर्दन पूरी तरह से आग की चपेट में आ जाने से उनकी सांस की नली बंद हो गई है। इस वजह से उनकी हालत चिंताजनक बनी हुई है। उन्होंने बताया कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं हो जाती तब तक अध्यापकों की ओर से बस स्टैंड चौक पर अनिश्चितकाल के लिए धरना लगाया जाएगा।
‘दस सालों से अध्यापक कर रहे रेगुलर करने की मांग’
बीतेे दस सालों से अधिक समय से अध्यापक अपनी नौकरी रेगुलर करने की मांग पर प्रदेश सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। अध्यापक यूनियन नेता दर्शन सिंह ने बताया कि सरकार उन्हें पांच हजार रुपये प्रति माह वेतन देती है, लेकिन वह भी उन्हें समय सिर नहीं मिलता।
उन्होंने बताया कि वेतन न मिलने से अध्यापकों के आर्थिक हालात लगातार बद से बदतर होते जा रहे हैं। इस वजह से अब अध्यापकों के पास खुदकुशी करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा।