विधानसभा के बजट सेशन में विनियोग विधेयक-16 की मांगों पर बहस के दौरान विपक्ष ने पंजाब सरकार पर हमला बोला। कांग्रेस का आरोप था कि सरकार ने अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए एक्साइज पॉलिसी में बदलाव किया है।
बलबीर सिद्धू ने कहा कि सरकार पंजाब के शराब कारोबार पर अपने कुछ लोगों की मोनोपली कायम करना चाहती है। पहले एल-1 लाइसेंस होल्डर के पास शराब कंपनियों से सीधे शराब लेने का अधिकार होता था। अब इनके ऊपर सरकार ने एक नया लाइसेंस एल-1-ए शुरू करने का प्रावधान किया है। जिसमें अंग्रेजी शराब के तीन और बियर के दो लाइसेंस दिए जाएंगे।
ये लोग कंपनियों से शराब लेकर आगे एल-1 लाइसेंस धारक को देंगे। इससे पूरे कारोबार पर इन पांच लाइसेंस धारकों का वर्चस्व हो जाएगा। इससे छोटे कारोबारी तबाह हो जाएंगे और शराब की कीमतें बढ़ जाएंगी। सिद्धू ने आरोप लगाया कि इसकेजरिए करोड़ों रुपये इकट्ठा करने की साजिश रची जा रही है, जिसे चुनाव में इस्तेमाल किया जाएगा।
दीप मल्होत्रा ने इस पर आपत्ति जताई, सभी विधायकों द्वारा शराब न पीने की शपथ लेने का मुद्दा भी उठा। जिसकेबाद डिप्टी सीएम सुखबीर बादल ने स्पष्ट किया कि पहले दो नंबर में काफी माल जाता था उसे रोकने को एल-1-ए बनाया गया है, जहां पर ईटीओ बैठेंगे। इनके लिए पांच लाइसेंस की बाध्यता नहीं है। एल-1-ए सरकार नहीं, बल्कि शराब निर्माता कंपनी तय करेगी। इस बार शराब की अधिकतम कीमत भी रखी गई है, इसलिए कीमतें बढ़ेंगी नहीं, कम होंगी।
सदन में पॉवर सरप्लस के मुद्दे पर भी बहस हुई। राणा गुरजीत ने कहा कि अगर बिजली सरप्लस है तो एक हजार करोड़ रुपये की बिजली क्यों खरीदी गई। सरकार ने इक्विटी का 3741 करोड़ रुपये जेनरेशन और ट्रांसमिशन पर डाल दिया। अगर सरकार ईमानदार है तो उसे उपभोक्ताओं को 1.10 रुपये प्रति यूनिट बिजली सस्ती करके लोगों को देनी चाहिए ताकि उन्हें राहत मिल सके।
उन्होंने कहा कि सरकारी प्लांट की यूनिटें बंद हैं, जबकि सरकार बाहर से बिजली खरीद रही है जो मंहगी है। सुनील जाखड़ ने कहा कि निजी पॉवर प्लांटों को फायदा देने को लोगों पर बोझ डाला जा रहा है। सोम प्रकाश, पवन टीनू, प्रकाश चंद्र गर्ग ने भी बहस में हिस्सा लिया।