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पुलिस अधिकारी की बेहतरीन पहल: वंचित बच्चों को मुफ्त में दिला रहा IAS-IPS की कोचिंग, रहने-खाने की व्यवस्था भी

Wed, 06 Apr 2022 04:20 PM IST
ajay kumar एएनआई, लुधियाना

सार

संस्थान को देशभर से आवेदन मिलते हैं। इसके बाद प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाती है। शीर्ष 50 छात्रों को प्रवेश दिया जाता है। पिछली बार करीब 500 आवेदन मिले थे।
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लुधियाना में आईएएस-आईपीएस की मुफ्त कोचिंग - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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पंजाब के लुधियाना में एक पुलिस अधिकारी की पहल आपका दिल खुश कर देगी। यह अधिकारी समाज के वंचित तबके के बच्चों की मदद पिछले पांच साल से कर रहा है। वह बच्चों को रहने और खाने के साथ-साथ नि:शुल्क आईएएस-आईपीएस की कोचिंग मुहैया करा रहे हैं। खास बात यह है कि न केवल लुधियाना से बल्कि पंजाब समेत देश के विभिन्न हिस्सों से छात्र यहां कोचिंग लेने आते हैं।

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इस पुलिस अधिकारी का नाम है गुरदेव सिंह। वह सहायक उप-निरीक्षक (एएसआई) हैं और पुलिस आयुक्त कार्यालय में हेड क्लर्क के रूप में तैनात थे। उन्होंने कहा कि लगभग पांच साल पहले मैं अपनी बेटी को आईएएस के एक कोचिंग सेंटर में प्रवेश दिलाने दिल्ली गया था। वहां मुझे कोचिंग के साथ-साथ आवास, भोजन के लिए पांच लाख रुपये अदा करने को कहा गया। इससे मुझे लगा कि समाज के गरीब वर्ग के बच्चे आईएएस या आईपीएस बनने का इतना बड़ा खर्च कैसे उठा सकते हैं।

इसके बाद मैंने लुधियाना में श्री सद्गुरु रविदास वेलफेयर मिशन ऑर्गनाइजेशन इंटरनेशनल नामक संस्थान की शुरुआत की और पिछले पांच वर्षों से देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले छात्रों को रहने और खाने के साथ-साथ बच्चों को मुफ्त कोचिंग प्रदान कर रहा हूं।
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गुरदेव सिंह ने बताया कि अब तक यहां से पढ़कर 27 छात्रों ने विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरी हासिल की है। उन्होंने कहा कि संगठन के 50 से अधिक सदस्य हैं जो प्रति माह 1,000 रुपये का योगदान देते हैं। इस संस्थान में प्रवेश प्रक्रिया जून महीने में शुरू होती है। वहीं 2.5 लाख रुपये से कम वार्षिक पारिवारिक आय वाले छात्रों को ही यहां प्रवेश मिलता है। 

देशभर से आते हैं आवेदन
संस्थान को देशभर से आवेदन मिलते हैं। इसके बाद प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाती है। शीर्ष 50 छात्रों को प्रवेश दिया जाता है। पिछली बार करीब 500 आवेदन मिले थे। संस्थान के पूर्व छात्र और अब शिक्षक जसपाल सिंह ने कहा कि यहां आने के बाद मेरा जीवन बदल गया। मैंने पंजाब सिविल सेवा (पीसीएस) एक बार और संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा तीन बार दी है, हालांकि मैं साक्षात्कार में कामयाब नहीं हो सका। इसके अलावा मैंने कई अन्य सरकारी नौकरियों की भी परीक्षाएं दीं और जल्द ही मुझे एक वरिष्ठ औद्योगिक विकास अधिकारी के रूप में नियुक्ति मिलने जा रही है। संस्थान मामूली वेतन दे रहा है लेकिन नौकरी मिलने के बाद वह यहां के बच्चों को मुफ्त में पढ़ाएंगे।

संस्थान की एक छात्रा गायत्री ने कहा कि मेरी मां नौकरानी हैं और मेरे पिता फिजियोथेरेपिस्ट के रूप में काम करते हैं। मेरे परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि मैं कोचिंग के लिए लाखों खर्च कर सकूं। यहां संस्थान मुफ्त दे रही है। अपने सपने को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत कर रही हूं।

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