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पंचकूला की मंडियों में सेब की केवल 50 फीसदी आवक, फिर भी खरीदारों का टोटा, व्यापारी हुए पस्त

Wed, 09 Sep 2020 04:06 PM IST
खुशबू गोयल अरविंद बाजपेयी, पंचकूला
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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हिमाचल में हुई ओलावृष्टि और बागानों में कीटों के संक्रमण ने कोरोना काल में सेब व्यापारियों को पस्त कर दिया है। जिले की सेब मंडी में बागानों से केवल 50 फीसदी की सेब आ रहा है। इस सेब को भी ज्यादा खरीदार नहीं मिल पा रहे हैं। कोरोना के कारण देश विभिन्न हिस्सों से सजी रहने वाली सेब की मंडियों में अबकी बार सन्नाटा पसरा हुआ है। असल में कोरोना का असर सेब के बागानों पर पड़ा है। मजदूर नहीं मिलने से सेब की तुड़ाई में देरी हो गई। इस कारण सेबों में भी कीटों का संक्रमण हो गया। सेब
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के बागानों का असर देश की सेब मंडियों में नजर आ रहा है। मंडियों में सेब कम आ रहा है, जो सेब आ रहा है उसके भी खरीदार नहीं मिल रहे हैं। दोहरे संक्रमण के दौर से गुजरने के कारण भी सेबों के दामों में पिछले सीजन के मुकाबले तेजी है। जिले में 90 सेब के आढ़ती हैं। हालातों को देखकर कई अबकी बार सेब का काम ही नहीं कर रहे हैं। एक सेब आढ़ती ने बताया कि पहले प्रतिदिन एक लाख पेटियों की आवक होती थी। अबकी बार एक माह पहले तीस हजार पेटियां और अब पचास हजार पेटियां प्रतिदिन मंडी में आ रही हैं। इसके लिए भी व्यापारी ज्यादा नहीं मिल रहे हैं।

जानकारी के अनुसार लॉकडाउन के कारण सेब बागान में सेब की तुड़ान करने वाले मजदूरों के चले जाने के कारण बागान मालिकों को स्थानीय स्तर पर ही सेब का तुड़ान करना पड़ा। इससे तुड़ान में देरी हो गई और सेब में कीड़ा लग गया। इस वजह से काफी सेब खराब हो गया। इसके साथ ही हिमाचल में हुई ओलावृष्टि ने भी फसल को खराब कर दिया। पंचकूला से सेब मद्रास, कोलकाता, भोपाल, यूपी, नई दिल्ली, महाराष्ट्र जाता था। अबकी बार इन सिटी में जाने वाले सेब की खेप काफी कम हो चुकी है। अभी पंचकूला की मंडी में ज्यादातर सेब शिमला और आसपास का ही आ रहा है।
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अबकी बार सीधे चले गए पराला

अबकी बार सेब खरीदने वाले ज्यादातर व्यापारी सीधे हिमाचल की पराला मंडी चले गए। इस वजह से पंचकूला के व्यापारियों को ज्यादा नुकसान हो गया। पंचकूला के एक सेब व्यापारी का कहना है कि सेब कम होने के कारण भी ऐसा हुआ है क्योंकि किसानों ने सेब सीधे ही बेच दिए हैं।

                     पिछले साल दाम      अबकी बार दाम
रायल सेब       1700 रुपये पेटी          2700 रुपये पेटी
गोल्डन सेब        1000 रुपये पेटी         1300 रुपये पेटी
रेड रायल           1200 रुपये पेटी         1800 रुपये पेटी
रेड गोल्डन          800 रुपये पेटी           1000 रुपये पेटी
(एक पेटी में 20 किलो सेब)

पंचकूला मंडी में सेब के व्यापारी        90
गत वर्ष सेब की आवक (प्रतिदिन)      एक लाख पेटियां
इस वर्ष सेब की आवक (प्रतिदिन)      पचास हजार पेटियां
पंचकूला से सेब की सप्लाई               महाराष्ट्र, मद्रास, अहमदाबाद, बनारस, इंदौर आदि।
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मैं सेब का ही कारोबार करता हूं। पिछले साल तक एक लाख पेटी सेब रोजाना आता था लेकिन अबकी बार सेब की आवक सिर्फ चालीस से पचास फीसदी तक रह गई है। सेब काटने वाले नेपाली मजदूरों के चले जाने के कारण सेब बागानों में समय से तोड़ा नहीं जा सका। इससे उसमें संक्रमण की स्थिति आ गई। इससे सेब आधा रह गया। इसके साथ ही बाहर से आने वाले व्यापारी हिमाचल चले गए। इस वजह से हमारा सीधा नुकसान हो गया।  
- सुभाष चंद्र रंधावा, सेब आढ़ती पंचकूला।

हमको इस बार उम्मीद थी कि सेब का कारोबार अच्छा होगा, लेकिन हमारी उम्मीदों पर पानी फिर गया। एक तो यहां देशभर से सेब खरीदने वाले व्यापारी नहीं आए और दूसरा बागानों में संक्रमण की वजह से सेब की आवक भी आधी से कम रह गई। जो सेब आ भी रहा है वह काफी ज्यादा महंगा है। इस वजह से सेब के धंधे में मुनाफा नहीं रह गया।  
- दिग्विजय कपूर, सेब आढ़ती पंचकूला और सब्जी मंडी आढ़ती एसोसिएशन अध्यक्ष।
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