पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के राजनीतिक सलाहकार रहे प्रोफेसर विरेंद्र को देशद्रोह के आरोप में जमानत के बाद अब उनके करीबी जयदीप धनखड़ को भी अग्रिम जमानत मिल गई है।कांग्रेस के ग्रामीण जिलाध्यक्ष रहे धनखड़ को राजद्रोह के केस में शामिल करने वाली पुलिस की एक बार फिर कोर्ट में किरकिरी हुई।
एडिशनल सेशन जज जसबीर सिंह की कोर्ट में बुधवार को दोनों पक्ष के वकीलों में लगभग एक घंटे तक बहस हुई। धनखड़ के वकीलों ने सबसे बड़ा तर्क यह रखा कि जब ऑडियो क्लिप से राजद्रोह का केस नहीं बनता तो फोन मिलाकर बात कराने पर कैसे बन सकता है? वहीं, जांच फाइल सही नहीं होने पर कोर्ट ने एसआईटी को फटकार भी लगाई।
दरअसल प्रोफेसर विरेंद्र सिंह ने जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान दलाल खाप के नेता कैप्टन मान सिंह के साथ फोन पर बातचीत की थी। बातचीत में प्रोफेसर सिरसा में जाम लगाने की बात कह रहे हैं। ऑडियो वायरल होने के बाद भिवानी के कैप्टन पवन कुमार ने प्रोफेसर पर देशद्रोह का केस दर्ज कराया। इसकी जांच के लिए डीएसपी पवन शर्मा के नेतृत्व में एसआईटी बनाई गई। एसआईटी की जांच में सामने आया था कि यह विवादित कॉल प्रोफेसर ने जयदीप धनखड़ के मोबाइल फोन से की थी।
जयदीप धनखड़ ने फोन मिलाकर प्रोफेसर को दिया था। इस कारण ही एसआईटी ने जयदीप का नाम भी देशद्रोह के केस में शामिल कर लिया। इसके बाद धनखड़ के वकीलों ने कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका लगाई। बुधवार को एसआईटी प्रभारी डीएसपी पवन शर्मा और दो सरकारी वकील कोर्ट में पेश हुए। जबकि धनखड़ की ओर से वकील नसीब पंघाल, रघुबीर हुड्डा व जे. के. गक्खड़ मौजूद रहे।
धनखड़ के वकीलों ने कोर्ट में कहा कि जिस फोन कॉल को कराने के कारण हमारे मुवक्किल पर राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया है, उसी ऑडियो टेप के बारे में अदालत पहले कह चुकी है कि इस टेप के आधार पर देशद्रोह का केस नहीं बनता। जब ऑडियो रिकार्डिंग से देशद्रोह का केस नहीं बनता है तो केवल फोन मिलाकर देने से कैसे बन सकता है? एक घंटे तक बहस के बाद कोर्ट ने दोपहर बाद फैसला सुनाया और धनखड़ की अग्रिम जमानत याचिका मंजूर कर ली गई।
एसआईटी की फाइल तक ठीक नहीं मिली
कोर्ट ने डीएसपी पवन शर्मा से पूछा कि किस आधार पर राजद्रोह का मुकदमा हुआ है। डीएसपी ने बताया कि 25 और 26 मार्च को धनखड़ से पूछताछ की गई थी। इस दौरान धनखड़ से 128 सवाल पूछे गए। उस पूछताछ के दौरान कई सवालों के धनखड़ ने ऐसे जवाब दिए है कि उनमें देशद्रोह का आरोप बनता है। इस पर जज ने वह फाइल दिखाने और उन सवालों के नंबर बताने के लिए कहा। लेकिन वह फाइल ही ठीक नहीं थी और एसआईटी सवालों के बारे में नहीं बता सकी। कोर्ट ने एसआईटी को फटकार लगाते हुए कहा कि जब तुम ऐसे मामले में भी जांच को ठीक से नहीं कर सकते तो फिर क्या कर सकते हो? क्योंकि फाइल में पूछताछ के सवालों के नंबर भी ठीक से नहीं लिखे गए हैं।